नई दिल्ली: उन्नाव गैंगरेप केस की जांच कर रही सीबीआई ने बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर लगे रेप के आरोपों की पुष्टि कर दी है. सीबीआई ने जांच में यह भी पाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य आरोपियों का नाम एफआईआर में दर्ज नहीं कर उन्हें बचाने की कोशिश की.अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक उन्नाव गैंगरेप केस में सीबीआई ने पीड़िता द्वारा लगाए गए उन आरोपों की पुष्टि की है जिसमें उसने कहा था कि पिछले साल 4 जून को बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने उसका रेप किया था, जबकि उस दौरान उनकी महिला सहयोगी शशि सिंह कमरे के बाहर पहरा दे रही थी.Also Read - Jharkhand News: सीबीआई करेगी झारखंड के जज की मौत के मामले में जांच

पुलिस ने मेडिकल जांच में देरी की
सूत्रों के मुताबिक, पीड़ित लड़की जहां बांगरमऊ के विधायक सेंगर का नाम लेती रही, वहीं स्थानीय पुलिस ने 20 जून को दर्ज एफआईआर में विधायक और अन्य आरोपियों के नाम शामिल नहीं किए. सीबीआई ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज किया जिसमें वह अपने आरोपों पर बनी रही. सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने लड़की की मेडिकल जांच में भी देरी की और लड़की के वजाइनल स्वैब और कपड़ों को फोरेंसिक लैब नहीं भेजा. उन्होंने कहा कि यह सबकुछ जानबूझकर और आरोपियों की मिलीभगत से किया गया. Also Read - Parliament Monsoon Session 2021: राज्यसभा में हंगामा कर रहे TMC के 6 सांसद निलंबित, सभापति ने पहले किया था आगाह

एक साथ बैठा सीबीआई ने की थी जांच
बता दें कि उन्नाव रेप केस की जांच कर रही सीबीआइ ने पिछले महीने लखनऊ में आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़िता का आमना-सामना कराया था. पीड़िता ने पिछले वर्ष चार जून को विधायक द्वारा रेप किए जाने का आरोप दोहराया लेकिन, विधायक इससे इनकार करते रहे. विधायक ने पीडि़ता की बात काटने की कोशिश की लेकिन, उसने सिरे से खारिज कर दिया. सीबीआइ के अफसरों ने दोनों से अलग-अलग हुई पूछताछ के तथ्यों को भी सामने रखा और एक दूसरे से पुष्टि की. Also Read - बीजेपी ने कहा- राहुल गांधी कांग्रेस शासित राज्यों में बलात्कार के मामलों पर नहीं बोलते हैं, न ट्वीट करते हैं

पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में हई थी मौत
गौरतलब है कि विपक्ष की आलोचना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्नाव गैंगरेप केस की जांच सीबीआई को देने का फैसला किया था. इसके साथ ही सरकार ने पीड़िता के पिता की मौत की जांच भी सीबीआई से कराने का फैसला किया था. बता दें कि रेप पीड़िता आरोपी सीएम दरबार में पहुंची थी, लेकिन उसे सीएम से मिलने की इजाजत नहीं दी गई. इससे आहत होकर उसने सीएम आवास के बाहर सुसाइड की भी कोशिश की. इस बीच उसके पिता की पुलिस हिरासत में मौत भी हो गई जिसे पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया था.