लखनऊ: सीबीआई की एक विशेष अदालत ने बुधवार को कहा कि अयोध्या में 1992 में विवादित ढांचा तोड़ने के लिए शरारती तत्व जिम्मेदार थे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा विश्व हिंदू परिषद के स्वयंसेवकों ने स्थिति को संभाला. Also Read - कोरोना संकट के बीच अयोध्‍या में शनिवार से शुरू होगी रामलीला, राजनीतिक और बॉलीवुड कलाकार लेंगे हिस्सा

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐसे उपद्रवी ‘कारसेवकों’ को कभी भी ‘राम भक्त’ नहीं कहा जा सकता क्योंकि उनके कारनामों से राष्ट्र की पंथनिरपेक्ष छवि को धक्का लगा और उच्चतम न्यायालय को भी 2019 में दिए गए अपने फैसले में इससे संबंधित टिप्पणी करनी पड़ी. Also Read - Ayodhya Ram Mandir: रामेश्वरम से बुलेट रानी लाईं 613 किलो का घंटा, अयोध्या के राममंदिर में लगा, कई किलोमीटर गूंजेगी ध्वनि

विशेष न्यायाधीश एस के यादव ने 2,300 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि इसका कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि उपद्रवी तत्व और आरोपियों ने मिलकर कोई षड्यंत्र रचा था. सीबीआई की अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद ने स्थिति को संभाला और इस बाबत उनके द्वारा निर्देश दिया गया. Also Read - 4500 किमी से अयोध्या में राममंदिर के लिए 613 किलो का घंटा पहुंचा, 8 KM तक गूंजेगी ध्वनि, देखें फोटोज

अदालत ने कहा कि उनके द्वारा महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और संवाददाताओं के बैठने के लिए व्यवस्था की गई थी. अदालत ने कहा कि कारसेवकों के एक अलग समूह द्वारा अराजकता उत्पन्न की गई जो शरारती या असामाजिक तत्व थे. अयोध्या मस्जिद न्यास इंडो इस्लामिक कल्चरल फॉउंडेशन के सचिव अतहर हुसैन ने उम्मीद जताई कि सीबीआई, विशेष अदालत के फैसले के विरुद्ध अपील करेगी.

अयोध्या मस्जिद न्यास इंडो इस्लामिक कल्चरल फॉउंडेशन के सचिव अतहर हुसैन ने उम्मीद जताई कि सीबीआई, विशेष अदालत के फैसले के विरुद्ध अपील करेगी. आपको बता दें कि बुधवार को बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह समेत 32 अभियुक्तों को बड़ी राहत देते हुए सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें इस मामले में बरी कर दिया.

 

(इनपुट एजेंसी)