देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने आज राजधानी में आयोजित ‘जनता मिलन’ कार्यक्रम में एक प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका को निलंबित करने और उसे हिरासत में लेने के आदेश दिये. आवेश में आये मुख्यमंत्री रावत ने उत्तरकाशी जिले के नौगांव प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षिका उत्तरा बहुगुणा पंत के खिलाफ कार्रवाई के आदेश तब दिये जब उसने अपने तबादले के लिए गुहार लगायी.Also Read - Uttarakhand: कल से शुरू हो रही है चारधाम की यात्रा, जानें क्या हैं नियम व दिशानिर्देश

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उत्तरा ने कहा कि वह पिछले 25 साल से दुर्गम क्षेत्र में अपनी सेवायें दे रही है और अब अपने बच्चों के साथ रहना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि उनके पति की मृत्यु हो चुकी है और अब वह देहरादून में अपने बच्चों को अनाथ नहीं छोड़ना चाहतीं. उत्तरा ने कहा कि उनकी स्थिति ऐसी है कि ना वे बच्चों को अकेला छोड़ सकती हूं और ना ही नौकरी छोड़ सकती हैं. मुख्यमंत्री द्वारा यह पूछे जाने पर कि नौकरी लेते वक्त उन्होंने क्या लिख कर दिया था? उत्तरा ने गुस्से में जवाब दिया कि उन्होंने यह लिखकर नहीं दिया था कि जीवन भर वनवास में रहेंगी. Also Read - Retired Lt Gen गुरमीत सिंह उत्तराखंड के नए राज्‍यपाल नियुक्‍त, आरएन रवि तमिलनाडु और पुरोहित पंजाब भेजे गए

शिक्षिका को हिरासत में लेने के निर्देश

इससे मुख्यमंत्री भी आवेश में आ गये और उन्होंने शिक्षिका को सभ्यता से अपनी बात रखने को कहा, लेकिन जब उत्तरा नहीं मानीं तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों को उन्हें तुरंत निलंबित करने और हिरासत में लेने के निर्देश दिये. सरकारी सूत्रों ने बताया कि शिक्षिका को मुख्यमंत्री के निर्देश पर निलंबित कर दिया गया है. हालांकि, बाद में उन्हें हिरासत से रिहा कर दिया गया. यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति में भी इस घटना का जिक्र करते हुए कहा गया है कि अपने स्थानांतरण के लिए आई उत्तरकाशी की एक प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका ने अभद्रता दिखाई और अपशब्दों का प्रयोग किया. शिक्षिका से अपनी बात मर्यादित ढंग से रखने का अनुरोध किए जाने पर भी जब शिक्षिका ने लगातार अभद्रता किया तो उक्त शिक्षिका को निलम्बित करने के निर्देश दिए गए.

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सीएम बोले-स्‍थानांतरण की गुहार जनता मिलन में न करें

उत्तरा के अलावा कई अन्य सरकारी कर्मचारी भी दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में अपने स्थानांतरण की गुहार लगाने ‘जनता मिलन’ कार्यक्रम पहुंचे थे, लेकिन मुख्यमंत्री रावत ने साफ किया कि यह कार्यक्रम ऐसी बातों को उठाने के लिए उचित मंच नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसमस्याओं की सुनवाई के दौरान स्थानान्तरण संबंधी अनुरोध बिल्कुल न लाए जाएं। राज्य में तबादला कानून लागू होने से राजकीय सेवाओं के सभी स्थानान्तरण नियामानुसार किए जाएगे. स्थानांतरण के लिए जनता मिलन कार्यक्रम उचित मंच नहीं है. (इनपुट एजेंसी)