लखनऊ/देहरादून: उत्‍तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को रिंग रोड स्थित किसान भवन में ‘ओक तसर विकास परियोजना’ (टीएसपी) का शुभारम्भ किया. यह परियोजना केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से सीएसएस के तहत किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने रेशम कीड़ों की सप्‍लाई के लिए राज्य सरकार की ओर से एक करोड़ रुपये सहायता एवं उत्तराखंड में रेशम के ओक तसर रिसर्च सेंटर के लिए अनुकूलता के आधार पर भूमि मुहैया कराने की घोषणा की. हिमाचल प्रदेश की भांति उत्तराखण्ड में भी रेशम के कीड़ों के लिए किसानों के लिए धनराशि की व्यवस्था किये जाने की घोषणा की. इस दौरान मुख्यमंत्री ने रेशम विभाग की पुस्तक एवं फोल्डर का विमोचन और स्‍टॉलों का निरीक्षण भी किया. Also Read - CM योगी ने दूसरे राज्‍यों से की अपील, यूपी के लोगों के खाने-रहने की व्‍यवस्‍था करें, हम खर्च देंगे

उत्‍तराखंड में रिवर राफ्टिंग और पैराग्‍लाइडिंग पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, जानें कारण? Also Read - Coronavirus: उत्तराखंड में कर्मचारियों पर देश में 'महामारी एक्ट' के तहत पहला केस

इस अवसर पर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि ओक तसर विकास परियोजना से रेशम उद्योग से जुड़े किसानों को रोजगार के नये आयाम जुड़ेंगे. प्रदेश में रेशम उत्पादन में वृद्धि होने से किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन सकता है. उत्तराखंड में बाँज प्राकृतिक रूप से अत्यधिक मात्रा में पैदा होता है. बाँज पर्यावरण एवं पानी के श्रोत विकसित करने लिए बहुत उपयुक्त है. मणिपुरी बॉज के पौध उत्तराखण्ड में लगाना लाभप्रद होगा. इस बॉज की ग्रोथ भी अच्छी है व इसकी पत्तियां कोमल भी होती हैं. उन्होंने कहा कि मैदानी जनपदों में रेशम उत्पादन में कमी आई है, रेशम के उत्पादन वृद्धि करने के लिए उन्होंने और अधिक प्रयासों की जरूरत बतायी. पर्वतीय क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में कृषि भूमि उपलब्ध है वहां पर भी ओक एवं मलबरी के पौध रोपण कर किसान रेशम उत्पादन कर आय में वृद्धि कर सकते हैं. ओक एवं मलबरी के उत्पादन में वृद्धि के लिए कास्तकारों एवं रेशम विभाग को प्रयास करने होंगे. Also Read - सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत की घोषणा, उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी होगी गैरसैंण

55 मीट्रिक टन मलबरी सिल्क के उत्पादन का लक्ष्‍य
केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना से राज्य में रेशम उत्पादन में वृद्धि होगी. देश में सिल्क का उत्पादन लगभग 33 हजार मीट्रिक टन है. उत्तराखण्ड में मलबरी सिल्क का उत्पादन अभी 33 मीट्रिक टन है, जिसे 55 मीट्रिक टन किये जाने का लक्ष्य रखा गया है. टेक्सटाइल के क्षेत्र में देश के निर्यात में 18 से 22 प्रतिशत सिल्क का निर्यात भारत करता है. देश में सिल्क उत्पादन में वृद्धि के लिए निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं. कोसी के पुनर्जीवीकरण के लिए 500 हेक्टेयर वन पंचायत की भूमि पर बाँज का रोपण किया जायेगा. मणिपुरी बाँच के पौधे अधिक लगाये जायेंगे. इससे बॉज का ऐरिया बढ़ेगा और प्राकृतिक जल भी उपलब्ध होगा. इस अवसर पर कृषि एवं उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल, सांसद माला राज्यलक्ष्मी शाह, केन्द्रीय रेशम बोर्ड के अध्यक्ष के.एम हनुमन्थरायप्पा, अपर सचिव उद्यान डा. मेहरबान सिंह बिष्ट, उद्यान निदेशक आनन्द कुमार यादव मौजूद थे.