लखनऊ| उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अखिलेश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘गोमती रिवर फ्रंट’ पर वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने इस मामले पर अधिकारियों से 45 दिन में रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। बीते दिनों गोमती रिवर फ्रंट का दौरा करते वक्त उन्होंने अधिकारियों से जबाव तलब करते हुए परियोजना में खर्च हुए बजट को बहुत ज्यादा बताया था। Also Read - गाजियाबाद में खुला UP-NCR का पहला 'फोन बूथ', 5 मिनट में होगी कोरोना की जांच

योगी आदित्यनाथ ने गोमती नदी के पानी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ये इतना गंदा क्यों है? क्या सारा पैसा पत्थरों पर खर्च कर दिया गया है? परियोजना में घोटाले की आशंका जताते हुए उन्होंने अधिकारियों को नए सिरे से बजट का इस्टिमेट तैयार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि नदी में कोई गंदा नाला न गिरे और मई तक गोमती साफ हो जाना चाहिए। Also Read - पीएम मोदी के प्रयासों और उपायों के कारण कोरोना भारत में दूसरे स्टेज पर ही रूका : योगी आदित्यनाथ

काफी देर तक गोमती फ्रंट पर रहकर योगी ने परियोजना का बारीकी से निरीक्षण किया था। उन्होंने 6 किमी लंबी नदी को 3 मीटर तक गहरा किए जाने के बाद निकली मिट्टी का हिसाब भी अधिकारियों से मांगा है। Also Read - यूपी के ग्रामीणों ने गावों में प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध, उल्लंघन करने पर लगेगा जुर्माना, पूरा गांव क्वारंटीन

क्या है गोमती रिवर फ्रंट 
गोमती रिवर फ्रंट अखिलेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक थी। बीते साल 16 नवंबर को उन्होंने इसका लोकार्पण किया था। इस साल मार्च तक इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा होना था लेकिन अब भी काफी काम बचा हुआ है। इस परियोजना पर अब तक 1427 करोड़ पर खर्च हो चुके हैं। बताया जाता है कि जब इस परियोजना पर काम शुरू हुआ था तब इसकी अनुमानित लागत 1500 करोड़ रुपए थी।

बता दें गोमती का लंदन की थेल्स नदी की तर्ज पर सौंदर्यीकरण और साफ करने का काम चल रहा है। नदी के किनारे जॉगिंग ट्रैक, साइकिल ट्रैक, पार्क, बच्चों के लिए डिज्नी ड्रीम शो, टॉरनेडो फाउंटेन्स, वॉटर थिएटर बनाए गए हैं। इसके अलावा योग केंद्र, विवाह भवन और फूड प्लाजा, ओपन एम्पीथिएटर, क्रिकेट और फुटबॉल स्टेडियम भी बनाए जा रहे हैं।