लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस वैश्विक महामारी को फैलने से रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन के कारण प्रदेश वापस लौट रहे प्रवासी मजदूरों के लिए 11 लाख नौकरियां मुहैया कराने के मकसद से शुक्रवार को सहमति पत्रों पर दस्तखत किए. Also Read - मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार बुधवार को नहीं होगा: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

प्रदेश के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने तीन-तीन लाख नौकरियों की व्यवस्था की जबकि नर्डिको और लघु उद्योग भारती ने ढाई-ढाई लाख नौकरियों का इंतजाम किया है. Also Read - दिल्ली पहुंचे शिवराज सिंह चौहान, पार्टी के शीर्ष नेताओं से होगी मुलाकात, मंत्रिमंडल का होने वाला है विस्तार?

मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि इन सहमति पत्रों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में दस्तखत किए गए जिन्होंने प्रदेश लौट रहे प्रवासी मजदूरों को नौकरियां दिलाने का वादा किया है. Also Read - गृहमंत्री अमित शाह ने बाढ़ प्रभावित बिहार व असम के मुख्यमंत्रियों से की बात, दिया हर मदद का भरोसा

सिंह ने कहा कि जिन लोगों ने यह सवाल उठाया है कि राज्य सरकार कुशल एवं अर्धकुशल श्रमिकों को 11 लाख नौकरियां मुहैया कराने के भारी-भरकम लक्ष्य को कैसे पूरा करेगी, उन्हें सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग ने जवाब दे दिया है. सिंह ने कहा कि कुछ राज्य उत्तर प्रदेश के श्रमिकों को देनदारी मानते थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने उन्हें अपनी संपत्ति बनाया.

मंत्री सिंह ने बताया कि उनके विभाग ने प्रवासी मजदूरों के लिए एक नियंत्रण कक्ष बनाया है और अब तक 75000 इकाइयों में श्रमिकों के बकाये 1700 करोड़ रुपए का भुगतान सुनिश्चित किया जा चुका है.

सीएम योगी ने कहा क‍ि स्टेट लेवल बैंकर्स कमिटी के साथ हमारी बैठकें हो चुकी हैं यह कार्रवाई निरंतर आगे बढ़ रही है. इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, फिक्की, लघु उद्योग भारती, और नारडेको ने उत्तर प्रदेश के इस पोटेंशियल को लेकर जो रुचि दिखाई है, वह प्रशंसनीय है.