लखनऊ: पतंजलि आयुर्वेद के प्रदेश में यमुना एक्सप्रेस वे पर प्रस्तावित छह हजार करोड़ रुपये के मेगा फूड प्रोसेसिंग पार्क से पीछे हटने की खबरों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कंपनी के प्रबंध निदेशक (एमडी) आचार्य बालकृष्ण से बात की और उन्हें विश्वास दिलाया कि प्रक्रिया शीघ्र ही पूरी कर ली जायेगी और जो भी तकनीकी समस्या है उसे दूर कर लिया जाएगा.
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यूपी के प्रमुख सचिव अवनीश अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने आचार्य बालकृष्ण से बात की और उनकी परेशानियों को जाना. कोई आवंटन रद्द नहीं किया गया है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से इस मामले को शीघ्र निस्तारित करने को कहा है. बता दें कि मंगलवार शाम पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण ने ट्वीट करके कहा था कि हम फूड पार्क की परियोजना को रद्द कर रहे हैं क्योंकि यूपी सरकार से आवश्यक मंजूरी नहीं मिली है. उन्होंने अधिक कोई विवरण दिये बिना कहा कि कंपनी अब परियोजना को किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित करने की योजना बना रही है.
राज्य सरकार से सहयोग न मिलने की बात कही
राज्य से बाहर निकलने के कारण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि हमें इस परियोजना के लिए राज्य सरकार से कोई सहयोग नहीं मिला. उन्होंने मंजूरी के लिए लंबे समय तक इंतजार किया, लेकिन राज्य सरकार से अनुमति नहीं मिली. अब इस परियोजना को स्थानांतरित करने का फैसला किया है. बालकृष्ण ने दावा किया कि पतंजलि ने इस परियोजना के लिए वित्तीय संस्थानों से समर्थन प्राप्त कर लिया था.
मेगा फूड पार्क को राज्य सरकार ने नहीं दी मंजूरी
उन्होंने कहा कि हमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय से दो बार समय विस्तार प्राप्त हुआ और अब यह समय समाप्त हो रहा है, क्योंकि हमें राज्य सरकार से आवश्यक मंजूरी नहीं मिल सकी. मेगा फूड पार्क को 30 महीने के भीतर अमल में लाये जाने की आवश्यकता है और इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.
दस हजार नौकरियां पैदा करने का दावा
इससे पहले, पतंजलि ने कहा था कि यमुना एक्सप्रेसवे आधारित यह संयंत्र पूरी क्षमता के साथ संचालित होने पर सालाना 25,000 करोड़ रुपये के सामान का उत्पादन करेगा. इससे 10,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी. पतंजलि वर्तमान में नागपुर (म.प्र.) और तेजपुर (असम) समेत मेगा फूड पार्क परियोजनाओं में निवेश कर रही है. खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने पतंजलि को परियोजना की मंजूरी के लिए 30 जून तक का समय दिया था.
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