लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ज्यादातर इलाके गलन और ठिठुरन भरी सर्दी की चपेट में हैं और आने वाले एक-दो दिनों में इसकी शिद्दत और बढ़ने के आसार हैं. पिछले 24 घंटे के दौरान सूबे के अनेक मण्डलों में तापमान में खासी गिरावट आयी. मुजफ्फरनगर में पारा 1.6 डिग्री  पहुंच गया. प्रदेश सरकार ने कड़ाके की सर्दी के मद्देनजर प्रदेश में विकास खण्ड स्तर तक के सभी अधिकारियों को रात में भ्रमण करके यह सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिये हैं कि कोई भी व्यक्ति ठंड में खुले आसमान के नीचे ना सोये.

उत्‍तर प्रदेश के आंचलिक मौसम केन्द्र के निदेशक जेपी. गुप्ता ने बताया कि प्रदेश में गलन और ठिठुरन अभी और बढ़ेगी. आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में एक से दो डिग्री सेल्सियस की और गिरावट हो सकती है. हालांकि अगले एक सप्ताह तक बारिश की सम्भावना नहीं है. आमतौर पर खिली धूप निकलेगी. मौसम केन्द्र की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के ज्यादातर मण्डलों में रात के तापमान में खासी गिरावट दर्ज की गयी. इलाहाबाद, लखनऊ, बरेली और मेरठ मण्डलों में रात का तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा. इसके अलावा वाराणसी, फैजाबाद, कानपुर तथा आगरा मण्डलों में भी यह सामान्य से कम दर्ज किया गया.

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मुजफ्फरनगर सबसे ठंडा
पिछले 24 घंटे के दौरान मुजफ्फरनगर राज्य का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 1.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया. इस अवधि में कानपुर में न्यूनतम तापमान 3.2 डिग्री सेल्सियस, शाहजहांपुर में 3.5 डिग्री, आगरा में 3.8 डिग्री, मेरठ में 4.3 डिग्री, चुर्क में 4.6 डिग्री, लखनऊ और बरेली में 4.7-4.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. ये सभी सामान्य से चार से पांच डिग्री कम थे. अगले 24 घंटे के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में शीतलहर चलने का अनुमान है. प्रदेश के पश्चिमी भागों में कुछ स्थानों पर तेज बर्फीली हवा चलने की सम्भावना है.

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कोई भी व्यक्ति खुले मैदान में कतई ना सोने पाये
इस बीच, प्रदेश सरकार ने शीतलहर के मद्देनजर प्रदेश के सभी जिलों को बेसहारा लोगों को ठंड से बचाने के लिये रैन बसेरे बनाने के निर्देश दिये हैं. राज्य के मुख्य सचिव अनूप चन्द्र पाण्डेय ने प्रदेश के सभी मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि शीतलहर के मद्देनजर सभी जनपदीय, तहसील एवं प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को रात में अपने-अपने क्षेत्रों का भ्रमण कर यह सुनिश्चित कराना होगा कि कोई भी व्यक्ति खुले मैदान में कतई ना सोने पाये. बेसहारा लोगों को रात में ठहरने के लिये आवश्यकता अनुसार रैन बसेरों की व्यवस्था की जाए.