ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित जेवर एयरपोर्ट के लिए रास्ता साफ होता दिख रहा है. कुछ दिन पहले ऐसी रिपोर्ट आई थी कि किसानों ने इस हवाईअड्डे के लिए जमीन देने से इनकार कर दिया था. लेकिन अब गौतमबुद्ध नगर जिले के अधिकारियों और जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह ने दावा किया है कि जेवर क्षेत्र में सोमवार को 307 किसानों ने अपनी जमीन के अधिग्रहण के लिए सहमति दे दी. किसी एक दिन में सबसे ज्यादा किसानों ने इस तरह की सहमति दी है. अगर किसान जमीन देने को तैयार हो गए हैं तो DELHI-NCR को उसका दूसरा एयरपोर्ट जल्द मिलने का रास्ता साफ हो गया है. Also Read - Fresh Guidelines for International Passengers: विदेश से आ रहे यात्रियों के लिए जारी की नई गाइडलाइन, अब इन नियमों का करना होगा पालन

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कुछ किसानों के शुरूआती विरोध के बाद जिले के अधिकारियों और विधायक लगातार गांवों का दौरा करते रहे. उत्तर प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए इन गांवों में जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. इस परियोजना की अनुमानित लागत 15,000 से 20,000 करोड़ रुपये के बीच है. Also Read - भारतीय रेलवे का नया अवतार! अब रेलवे स्टेशन पर एयरपोर्ट की तरह होगी टिकट चेकिंग

विधायक धीरेंद्र सिंह के दावे के बाद माना जा रहा है कि दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के जेवर क्षेत्र में हवाई अड्डे के लिए 90 फीसदी से ज्यादा किसानों ने जमीन देने के लिए सहमति दे दी है. ऐसे में बाकी बचे 10 फीसदी जमीन का सरकार विभिन्न नियमों के तहत अधिग्रहण कर सकती है. हवाई हड्डे के लिए जमीन अधिग्रहण के काम को ही सबसे ज्यादा मुश्किल माना जा रहा था.

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परियोजना रद्द होने का मंडरा रहा था खतरा

इससे पहले बहुप्रतीक्षित जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की परियोजना पर रद्द होने का खतरा मंडराने लगा था. कहा जा रहा था कि इस एयरपोर्ट के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर किसानों से बात नहीं बनी तो सरकार इस परियोजना को छोड़ देगी. पिछले दिनों यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के अध्यक्ष प्रभात कुमार ने कहा था कि हमने जेवर हवाई अड्डा परियोजना के लिये प्रस्तावित इलाके में पड़ने वाले छह गांवों के प्रधानों और करीब 100 किसानों से मुलाकात करके उन्हें जमीन के प्रस्तावित खरीद मूल्य और अन्य लाभों के बारे में बताया है. अगर वे हवाई अड्डे के लिये जमीन देने को तैयार नहीं होते तो यह परियोजना रद्द भी हो सकती है.

जमीन खरीद को लेकर किसानों से बात नहीं बनी तो रद्द होगा जेवर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट

यीडा के अध्यक्ष प्रभात कुमार ने बताया था कि जेवर एयरपोर्ट के निर्माण के लिए किसानों को 2300 से 2500 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से जमीन का मुआवजा दिए जाने की पेशकश की गई थी. प्रदेश सरकार पहले चरण में आठ गांवों- रोही, परोही, बनवारीबस, रामनेर, दयानतपुर, किशोरपुर, मुकीमपुर शिवरा और रणहेरा में 1441 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है. सरकार इस परियोजना के लिये कुल पांच हजार हेक्टेयर जमीन लेना चाहती है. करीब 15 से 20 हजार करोड़ की लागत से प्रस्तावित इस हवाई अड्डे पर विमान सेवाओं का संचालन वर्ष 2022-23 तक शुरू होने की उम्मीद की जा रही है.