लखनऊ: पर्यावरण कार्यकर्ताओं और संरक्षणवादियों ने उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक नगर आगरा को धरोहर शहर का दर्जा देने की मांग की है. वहीं इसको स्मार्ट सिटी बनाने का काम भी जारी है. पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि आगरा को अपनी पहचान संरक्षित करने के लिए धरोहर शहर का दर्जा चाहिए. लापरवाह तरीके से हो रहा शहरी विकास ऐतिहासिक स्मारकों के लिए बड़ा खतरा है

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संरक्षणवादियों का कहना है कि तीन विश्व धरोहर स्मारकों- ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी, दो विचाराधीन स्मारकों सिकंदरा एवं एत्माद-उद-दौला और दर्जनों अन्य ऐतिहासिक निर्माण के साथ आगरा धरोहर शहर बनाए जाने के ‘पात्र’ है. सिकंदरा अकबर का मकबरा है. आगरा शहर की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक एत्माद-उद-दौला सफेद संगमरमर से बना पहला मकबरा है जो मुगल वास्तुशिल्प की लाल रेतीले पत्थरों से बनने वाली परंपरागत इमारतों से अलग हटकर कर एक नई शिल्प विधा से परिचय कराता है. आगरा के समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों में स्वामी बाग को जोड़ा गया है जो 114 साल के निर्माण कार्य के बाद 31 अगस्त को खुलने वाला है. कई लोग स्वामी बाग की गूढ़ नक्काशी और सजावट कार्यों के चलते इसे वास्तुशिल्प के लिहाज से ताजमहल को टक्कर देने वाला मानते हैं. यह राधास्वामी मत के संस्थापक की समाधि है.

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अतिक्रमण और कॉलोनियों के बेधड़क विकास पर लगे रोक
एनजीओ ब्रज मंडल हेरीटेज कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि आगरा को अपनी पहचान संरक्षित करने के लिए धरोहर शहर का दर्जा चाहिए. लापरवाह तरीके से हो रहा शहरी विकास ऐतिहासिक स्मारकों के लिए बड़ा खतरा है. स्मारकों के आस-पास अतिक्रमण और कॉलोनियों के बेधड़क विकास को रोका जाना चाहिए. आगरा और उसके आस-पड़ोस में प्रदूषण के खतरे के स्तर तक बढ़ने की खबरों के बाद उच्चतम न्यायालय आगरा में शहरी विकास कार्यों और ताज ट्रेपेजियम जोन अथॉरिटी के काम की निगरानी कर रहा है.