लखनऊ: यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का आज दोपहर उनके पैतृक गांव नरौरा में अंतिम संस्कार किया जाएगा. इस बीच यूपी सरकार ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि राज्य के 5 जिलों की एक एक सड़क का नाम कल्याण सिंह के नाम पर रखा जाएगा. वहीं राज्य के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राम मंदिर की तरफ जाने वाली सड़क का नाम कल्याण सिंह के नाम पर रखा जाएगा. बता दें कि लखनऊ, प्रयागराज, अलीगढ़ और बुलंदशहर में एक एक सड़क का नाम पूर्व मुख्यमंत्री के नाम पर होगा.Also Read - केशव प्रसाद मौर्य का अखिलेश यादव पर निशाना, 'रोजा-इफ्तार पार्टी करने वाले अब मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं'

बता दें कि राम मंदिर आंदोलन में कल्याण सिंह का योगदान सार्वजनिक रहा है. वहीं कई बार राम मंदिर के पक्ष में वे बोलते भी दिखे हैं. ऐसे में उनके योगदान को देखते हुए सरकार द्वारा यह फैसला लिया गया है. बता दें कि राम मंदिर का मुद्दा ही वह कारण था जिसके कारण उन्होंने अपनी मुख्यमंत्री तक की कुर्सी को छोड़ दिया था. इस कारण उनके इस त्याग को भी हमेशा समय समय पर सराहा जाता रहा है. ऐसे में उनके योगदान को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा यह फैसला लिया गया है. Also Read - आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के बाद अयोध्या में हाई अलर्ट, ID प्रूफ के बगैर नहीं मिलेगी एंट्री

सीएम पद से दिया था इस्तीफा Also Read - अयोध्या: राम मंदिर निर्माण में राजस्थान के गुलाबी पत्थरों का होगा इस्तेमाल, इस साल से दर्शन कर सकेंगे लोग

बता दें कि 9 दिसंबर 1992 में आयोध्या में जब बाबरी मस्जिद को ढांचे को कारसेवकों द्वारा ध्वस्त किया गया था उस दौरान राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह अपने आवास पर मौजूद थे. इस दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से बाबरी विध्वंस की जिम्मेदारी ली थी और सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था. बता दें कि सीएम के पद से इस्तीफा देना उनके जीवन के सबसे अहम फैसलों में से एक था. बता दें कि कल्याण सिंह द्वारा अधिकारियों को यह आदेश भी दिया गया था कि अयोध्या में कार सेवकों पर गोली न चलाई जाए.

राज्य में कल्याण सिंह के इस्तीफे के बाद सियासी भूचाल की स्थिति आ गई थी. उस समय के तत्कालीन राज्य सत्यनारायण रेड्डी भी असमंजस में थे कि कल्याण सिंह से इस्तीफा लिया जाए या सरकार को बर्खास्त कर दिया जाए. जब तक इस मामले पर चर्चा हो पाती या कोई समाधान निकल पाता इससे पहले कल्याण सिंह राज्यभवन पहुंच गए और मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था. यही कारण है कि हिंदुत्व के बड़े चेहरों में कल्याण सिंह का नाम भी टॉप की सूची में आता है. अपने दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि बाबरी विध्वंस को लेकर उन्हें किसी प्रकार का कोई अफसोस नहीं है. उन्होंने 6 दिसंबर 1992 के दिन को गर्व का विषय बताया था.