बांदा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तमाम हिदायतों के बाद भी बांदा जिले की विभिन्न तहसीलों में तैनात उपजिलाधिकारी अपना ठिकाना नहीं बदल रहे हैं. तहसील मुख्यालयों में सरकारी आवास होने के बावजूद आरोप है कि सभी उप-जिलाधिकारी जिला मुख्यालय को ही अपना ठिकाना बनाए हुए हैं. हालांकि अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) संतोष बहादुर सिंह का कहना है कि, “सभी उप-जिलाधिकरियों को शासनादेश के मुताबिक जिला मुख्यालय में आवास आवंटित किए गए हैं. जिला मुख्यालय में रात गुजारना शासनादेश का उल्लंघन नहीं है.” Also Read - पश्चिम बंगाल में कोरोना से मरने वालों की दर सबसे ज्यादा, केन्द्रीय दल ने प्रमुख सचिव को लिखा पत्र

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जब उनसे पूछा गया कि सभी उपजिलाधिकारी शाम पांच बजे के बाद तहसील मुख्यालय छोड़ कर जिले में हाजिर हो जाते हैं, ऐसे में अन्य प्रशासनिक कामों और आम आदमी के कामों का निपटारा कैसे होता है? तो उन्होंने कहा, “शाम पांच बजे के बाद ज्यादातर काम पुलिस विभाग से जुड़े होते हैं, तो क्षेत्राधिकारी और थानाध्यक्ष उप-जिलाधिकारी से आपसी सामंजस्य बनाकर निपटारा कर लेते हैं.” जब उन्हें ध्यान दिलाया गया कि एक नवंबर को मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सूबे के सभी तहसील स्तरीय राजस्व और पुलिस अधिकारियों को अपने तैनाती स्थल पर 24 घंटे मौजूद रहने की हिदायत दी थी, तो अपर जिलाधिकारी ने कहा, “हिदायतें तो मिलती ही रहती हैं.”

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उल्लेखनीय है कि उप-जिलाधिकारियों के हाजिर न रहने पर सबसे ज्यादा परेशानी पुलिस अधिकारियों को झेलनी पड़ रही है. पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) नरैनी ओमप्रकाश ने कहा, “खनिज विभाग ने 17 अप्रैल, 2017 को जारी शासनादेश संख्या-355 (2)/86-2017-371/2005 के द्वारा राजस्व और पुलिस अधिकारियों का एक संयुक्त विशेष कार्यबल का गठित किया है, जिसमें अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी उपजिलाधिरी (एसडीएम) और पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) को सौंपी गई है. लेकिन, उपजिलाधिकारी (नरैनी) कार्य दिवस में सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक तो तहसील मुख्यालय पर मौजूद रहते हैं, लेकिन इसके बाद वह जिला मुख्यालय रवाना हो जाते हैं. ऐसे में अवैध बालू खनन की सूचना पर या कोई सड़क दुर्घटना होने पर सड़क जाम की स्थिति से निपटने में अकेले पुलिस को जूझना पड़ता है.”

उन्होंने बताया, “16 मार्च, 2018 को प्रमुख सचिव ने जारी एक पत्र में कहा है कि अवैध बालू खनन पर कोई भी पुलिस अधिकारी सीधे कार्रवाई नहीं करेगा और अवैध खनन की सूचना विशेष कार्यबल को देगा. ऐसा न करने पर उनकी संलिप्तता मानी जाएगी.” सीओ ने कहा, “प्रमुख सचिव के पत्र से पुलिस अधिकारियों की स्थिति सांप और छछूंदर जैसी बनी हुई है. रात में ही ज्यादातर अवैध खनन की सूचनाएं मिलती हैं. उस समय उपजिलाधिकारी 35 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय में होते हैं. पुलिस को सीधे कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है और कार्रवाई न करने पर ‘संलिप्तता’ का डर सता रहा है.”

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पुलिस क्षेत्राधिकारी (अतर्रा) कुलदीप सिंह भी यही बात कहते हैं. उन्होंने कहा, “उपजिलाधिकारी अपने कार्य दिवस के सात घंटे तक तो तहसील में रहते हैं. इसके बाद वह जिला मुख्यालय चले जाते हैं. बालू का अवैध खनन हो या आम आदमी की अन्य समस्याएं, अकेले झेलना पड़ता है. बालू का अवैध खनन रोकने में पुलिस के लिए सबसे बड़ा रोड़ा प्रमुख सचिव का पत्र है, जिस पर हम अकेले कोई कदम नहीं उठा सकते हैं. इसका फायदा बालू माफिया उठा रहे हैं.” यहां बता दें कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक नवंबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सूबे के सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और पुलिस क्षेत्राधिकारियों को अपनी तैनाती स्थल के ही सरकारी आवास में रात गुजारने और क्षेत्र में उपलब्ध रहने की कड़ी हिदायत दी थी.