नई दिल्ली. बुलंदशहर में कथित गोकशी के बाद भीड़ द्वारा हंगामा, आगजनी और गोलीबारी करने के मामले में पुलिस ने अपनी पड़ताल तेज कर दी है. बुलंदशहर जिला पुलिस ने इस मामले में शुक्रवार की रात संदिग्ध आरोपियों की एक लिस्ट जारी की है. इस लिस्ट में पुलिस ने 23 आरोपियों का जिक्र किया है, जिनमें से 18 की तस्वीरें भी दी हैं. जिला पुलिस द्वारा किए गए इस ट्वीट में पांच ही ऐसे आरोपी हैं, जिनकी तस्वीरें पुलिस के पास उपलब्ध नहीं है. बुलंदशहर पुलिस के इस ट्वीट के अनुसार स्याना थाने की पुलिस को इन वांछित अभियुक्तों की तलाश है. आपको बता दें कि बुलंदशहर के चिंगरावठी गांव में बीते 3 दिसंबर को कथित गोकशी की घटना के बाद 400 लोगों की भीड़ और पुलिस के बीच टकराव में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को गोली मार दी गई. 20 वर्षीय एक अन्य युवक भी इस घटना में अपनी जान गंवा बैठा था. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने दिवंगत पुलिस अफसर की पत्नी को 40 लाख और उनके माता-पिता को 10 लाख रुपए की सहायता देने की घोषणा की थी.Also Read - UP Election 2022: योगी सरकार बांटेगी फ्री स्मार्टफोन और टैबलेट, युवाओं में ख़ुशी की लहर | Must Watch

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बुलंदशहर हिंसाः क्या सोची-समझी साजिश के तहत भीड़ ने किया ‘मर्डर’! इन 3 वजहों से जानिए पूरी कहानी Also Read - UP News: नहीं रहे राममंदिर आंदोलन के नायक कल्याण सिंह, यूपी में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित, कल होगा अंतिम संस्कार

बुलंदशहर हिंसा मामले के मुख्य आरोपियों में से एक सेना के जवान जीतू उर्फ़ जितेंद्र मलिक की शनिवार को सोपोर से गिरफ्तारी हुई थी. पुलिस ने आरोपी जीतू को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे बीते 9 दिसंबर को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था. उधर, इस मामले में सियासत गर्माने के बाद राज्य सरकार ने जिले के तीन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की थी. इसके तहत सरकार ने बुलंदशहर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कृष्णा बहादुर सिंह का तबादला कर दिया और उन्हें डीजीपी कार्यालय से अटैच कर दिया था. इसके अलावा सीओ सत्यप्रकाश शर्मा और चिंगरावठी थाने के पुलिस चौकी प्रभारी सुरेश कुमार का तबादला कर दिया गया था. वहीं, गिरफ्तार सेना के जवान जीतू ने अपने ऊपर आरोपों से साफ तौर पर इनकार किया था. जीतू ने कहा था कि पुलिस ने उसे फंसाया है. अब इस मामले में जिला पुलिस द्वारा आरोपियों की तस्वीर जारी करने के बाद जांच प्रक्रिया में तेजी आने के आसार हैं.

आपको बता दें कि बुलंदशहर में हुई हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत गर्मा गई थी. विपक्षी दलों, यहां तक कि सरकार में शामिल कुछ दलों के नेताओं ने भी हिंसा को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रशासन पर हमला किया था. मामले को लेकर सीएम योगी के बयानों पर भी विपक्षी दलों ने आपत्ति दर्ज कराई थी. हिंसा के कई दिनों बाद सीएम योगी द्वारा दिल्ली में अपने एक भाषण में इस घटना को महज दुर्घटना कहे जाने की विपक्षी दलों ने तीखी निंदा की थी. योगी ने कहा था कि उत्तरप्रदेश में भीड़ द्वारा हत्या करने की कोई घटना उनके समय में नहीं घटी है, बुलंदशहर की घटना एक दुर्घटना है और इस मामले में कोई भी अपराधी नहीं बच पाएगा. विपक्षी दलों ने बुलंदशहर की घटना को सोची-समझी साजिश करार देते हुए इसकी निष्पक्ष तरीके से जांच कराने की मांग की थी.