लखनऊ: संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मथुरा जेल में बंद गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के निलंबित प्रवक्ता डॉक्टर कफील खान पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत कार्रवाई की गई है. अलीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरी ने ‘भाषा’ को टेलीफोन पर बताया कि कफील के खिलाफ एनएसए की कार्यवाही की गई है और वह जेल में ही रहेंगे.

डॉक्टर कफील के भाई अदील खां ने राज्य सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि कफील खामोश रहें. कफील नए नागरिकता कानून के खिलाफ पिछली दिसंबर में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मथुरा जेल में बंद हैं. हालांकि उन्हें जमानत मिल चुकी है मगर उन्हें रिहा नहीं किया गया है.

अदील ने कहा “सरकार मेरे भाई को खामोश कराने की कोशिश कर रही है. कुछ दिन पहले, एक टीवी समाचार चैनल पर कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर कफील ने खुलासा किया था कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में रोजाना अनेक बच्चे मर रहे हैं लेकिन सरकार आंकड़ों और तथ्यों को छुपा रही है.” उन्होंने कहा ‘‘डॉक्टर कफील को शुक्रवार सुबह 6 बजे मथुरा जेल से रिहा किया जाना था. मेरा भाई काशिफ अपने वकील के साथ जेल पहुंचा लेकिन 9 बजे जेल में पुलिस बल की तादाद बढ़ा दी गई और हमसे मौखिक रूप से कहा गया कि कफील पर एनएसए की तामील कर दी गई है. ’’ एनएसए के तहत किसी भी व्यक्ति को तब तक जेल में रखा जा सकता है जब तक प्रशासन इस बात से संतुष्ट ना हो जाए कि उस व्यक्ति से राष्ट्रीय सुरक्षा या कानून व्यवस्था को कोई खतरा नहीं है.

खान को उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने गत 29 जनवरी को मुंबई में गिरफ्तार किया था. उनके खिलाफ अलीगढ़ के सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था. उन्हें मुंबई में गिरफ्तार करने के बाद अलीगढ़ लाया गया था मगर उन्हें फौरन मथुरा जेल भेज दिया गया था.

पुलिस का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन जारी है और अलीगढ़ जेल में कफील खान की मौजूदगी होने से शहर की कानून-व्यवस्था और खराब हो सकती है.

मालूम हो कि डॉक्टर कफील खान को अगस्त 2017 में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में कथित रूप से ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई 60 से ज्यादा बच्चों की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया था. करीब 2 साल के बाद जांच में खान को सभी प्रमुख आरोपों से बरी कर दिया गया था.