लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओम प्रकाश सिंह ने लखनऊ में एक कांस्टेबल द्वारा एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी के अधिकारी की गोली मारकर हत्या किये जाने के लिए पेशेवर प्रशिक्षण की कमी को जिम्मेदार बताते हुए गुरुवार को कहा कि सूबे के सिपाहियों के लिए ‘रीफ्रेशर कोर्स’ चलाने का निर्णय लिया गया है. Also Read - Uttar Pradesh Lockdown Guidelines: यूपी में दो दिन तक लॉकडाउन जैसी पाबंदियां, नहीं चलेंगी रोडवेज बसें; यहां देखें ताजा दिशानिर्देश

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पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि बीते शनिवार को लखनऊ के गोमतीनगर में ‘एप्पल’ कम्पनी के अधिकारी विवेक तिवारी की हत्या के आरोपी दोनों पुलिसकर्मी राज्य पुलिस के कोई ब्रांड एम्बेसडर नहीं हैं. हम ‘ट्रिगर हैप्पी’ नहीं बल्कि लोगों के मित्र हैं. ‘ट्रिगर हैप्पी’ से आशय मामूली उकसावे पर भी हिंसक प्रतिक्रिया करने और गोली चलाने से है. उन्होंने विवेक तिवारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए कहा कि किसी निहत्थे को गोली मारने का क्या औचित्य है? आरोपी सिपाहियों प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार को गिरफ्तार और बर्खास्त किया जा चुका है. पुलिस बल में शामिल कुछ लोगों की ऐसी हरकत से पूरे महकमे की कार्य संस्कृति का अंदाजा नहीं लगाया जाना चाहिए. Also Read - UP Panchayat chunav 2021 Results: यूपी पंचायत चुनावों की मतगणना कल, शिक्षक संगठनों ने की बहिष्कार की घोषणा

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रीफ्रेशर कोर्स चलाने का निर्णय

डीजीपी ने ऐसी घटनाओं के लिए पेशेवर प्रशिक्षण की कमी को जिम्मेदार करार देते हुए कहा कि 2013 से 2017 के बीच भर्ती किए गए सिपाहियों के लिए रीफ्रेशर कोर्स चलाने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने बताया कि रीफ्रेशर कोर्स आठ अक्टूबर को लखनऊ में शुरू होगा और इसे पूरे प्रदेश में चलाया जायेगा. इसमें सेवारत और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी सिपाहियों से बात कर उनकी काउंसलिंग करेंगे. हमारी कोशिश होगी कि सिपाहियों को जनता के प्रति अपना व्यवहार ठीक करने का प्रशिक्षण दिया जाये.

बीते कुछ सालों में पुलिसकर्मियों को नहीं मिली सही ट्रेनिंग

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्ष में पुलिसकर्मियों को उचित प्रशिक्षण नहीं दिया गया. यह उस समय की सरकार की नाकामी थी. उस दौरान पुलिसकर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण पेशेवर नहीं था और उनमें आम लोगों से कैसे बर्ताव करना चाहिए, इस पक्ष पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. सिंह ने कहा कि वर्ष 2013 में भर्ती सिपाहियों को तीन चरण में प्रशिक्षण दिया गया था. पहले चरण में 20166, दूसरे चरण में 15814 और तीसरे चरण में 3798 सिपाहियों को प्रशिक्षित किया गया. (इनपुट एजेंसी)