गोरखपुर: हर साल कांवड़ यात्रा देश में हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक बन कर सामने आ रही है. चाहे इंदौर में मुस्लिम महिलाओं का बुर्का पहन कर कांवड़ उठाना हो या देश के अलग अलग शहरों में कांवडियों की सेवा में लगे मुस्लिम सम्प्रदाय के लोग हों. ऐसी ही एक मिसाल मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का क्षेत्र पेश कर रहा है, जहां  15 मुस्लिम समुदाय के युवकों ने कांवड़ थामकर बाबा धाम की यात्रा शुरू की. भाईचारे की ये मिसाल गोरखपुर मण्डल के देवरिया जिले में गंगा-जमुनी तहजीब कायम करते हुए पेश की गई. Also Read - Sawan 2nd Somvar Vrat date and Vidhi: नवमी तिथि के साथ आ रहा है श्रावण का दूसरा सोमवार, जानें, महत्व और पूजन विधि

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ग्राम प्रधान ने किया प्रेरित और बन गई मिसाल Also Read - Shravan 2018: पूरे सावन अपने ससुराल में निवास करते हैं भोलेनाथ, हरिद्वार के पास स्‍थ‍ित है ये मंदिर...

इस पूरी मुहिम में देवरिया के रामपुर कारखाना स्थित कुशाहरी गांव के ग्राम प्रधान निज़ाम अंसारी ने सभी गांव वालों को मिल जुलकर सभी त्यौहार मनाने के लिए प्रेरित किया. अंसारी ने कहा कि इस प्रयास से सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे के और करीब आएगें और समाज की सेवा के ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेगें. कुशाहरी गांव के लगभग 70 कांवड़ियों ने बिहार स्थित बाबा धाम की यात्रा शुरू की. इन श्रद्धालुओं में 15 मुस्लिम भी भगवा धारण कर कदम से कदम मिला रहे हैं.

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यहां उत्तर दिशा में बहती हैं गंगा

श्रद्धालु सबसे पहले पहलेे बिहार के सुल्तानगंज पहुंचेगे फिर कावड़ में वे गंगा जल भरकर उसे अपने कंधो पर उठाकर पैदल यात्रा कर 140 किलोमीटर दूर झारखण्ड के जसीडीह स्थित बाबा धाम में महादेव का जलाभिषेक करेंगें. सुल्तानगंज बिहार के भागलपुर जिले में स्थित एक धार्मिक स्थल है. ये एकमात्र ऐसा स्थान है जहां गंगा नदी का बहाव उत्तरी दिशा में होता है. इस मेले के दौरान भक्तगण यहाँ आकर गंगा नदी में स्नान करते है और इस नदी के पवित्र जल को भरकर अपनी यात्रा प्रारंभ करते है. उनकी ये यात्रा देवघर के बाबा वैद्यनाथ मंदिर के शिवलिंग पर जल चढ़ाकर समाप्त होती है.

भक्तों की सभी इच्छा पूर्ण करते हैं बाबा भोलेनाथ

ऐसी मान्यता है की सुल्तानगंज से लाये गए गंगाजल को देवघर में स्थित शिवलिंग पर चढ़ाने से भक्तो की सम्पूर्ण इच्छाओं की पूर्ति होती है. इस दौरान मंदिर में बहुत भीड़ रहती है, मंदिर में चढ़ाये जाने वाले जल के लिए भक्तों को 5 से 6 घंटे के लिए इंतजार करना पड़ता है. ये भी कहा जाता है की ये भक्तों के लिये परीक्षा की घड़ी होती है. सावन मेले में भक्तों की दैनिक सुविधाओं का प्रबंध राज्य प्रशासन और मंदिर प्रशासन द्वारा किया जाता है.

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समाजसेवियों के प्रयास से शुरू हुई यात्रा

इस कांवड़ यात्रा को हरी झंडी दिखाने वाले समाजसेवी डॉ संजीव शुक्ला ने बताया कि कुशाहरी गांव में गंगा-जमुनी तहजीब की वास्तविक मिसाल पेश की गयी है. भाईचारा मजबूत करने के लिये यह बहुत अच्छा कदम है. खुशी है कि दोनों समुदायों के लोग प्रेम और एकता की नयी मिसाल कायम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि समाज को इससे प्रेरणा लेनी चाहिये तथा किसी भी तरह की नफरत को भुलाकर शांति और प्रेम को अपनाना चाहिये.

यात्रा पर निकले भक्तों ने कहा कि भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना शुरू हो गया है. इस महीने में भगवान शिव के जलाभिषेक का महत्त्व बहुत ज़्यादा है. यूं तो हर साल ही पूरे जोश में यात्रा शुरू की जाती है पर इस बार मिलजुल कर यात्रा करने का आनन्द अलग ही है.

रावण ने की थी महादेव की स्थापना

बताया जाता है कि सावन महीने में महादेव सभी श्रद्धालुओं की इच्छाओं की पूर्ति करते है. देश के कई शिवधामों में से ही एक प्रसिद्ध स्थल है झारखण्ड के देवघर में स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम. यहां हर साल आयोजित किया जाने वाला सावन मेला भी विश्वप्रसिद्ध है. ऐसी मान्यता है कि यहां शिवलिंग को रावण ने स्थापित किया था इसीलिए इसे रावणेश्वर महादेव मन्दिर भी कहा जाता है.