लखनऊ/देहरादून: उत्‍तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोमवार को जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर जैव ईंधन से उड़ान भरने वाले देश के पहले विमान स्‍पाइस जेट को फ्लैग ऑफ किया. फ्लैग ऑफ के बाद विमान ने दिल्ली के लिए उड़ान भरी. यह बायोफ्यूल जैट्रोफा के तेल एवं हाइड्रोजन के मिश्रण से बनाया गया है.

CM uttarakhand

इसके लिए आईआईपी में प्लांट लगाया गया है. संस्थान में बायोजेट फ्यूल तैयार किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ से बायोफ्यूल डेवलपमेंट अथॉरिटी के जरिये जैट्रोफा का बीज खरीदा गया है. इससे पूर्व जैव ईंधन से चलने वाले इस स्‍पाइस जेट का परीक्षण भी किया था. बताया गया कि अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में कमर्शियल विमान पहले से ही जैव ईंधन से उड़ान भर चुके हैं. जैव ईंधन से उड़ान भरने वाले स्पाइस जेट के फ्लैग ऑफ के अवसर पर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्या, आईआईपी के निदेशक अंजन कुमार रे, स्‍पाइस जेट से जी.पी. गुप्ता, कैप्टन सतीश चन्द्र पाण्डे एवं आईआईपी के वैज्ञानिक उपस्थित थे.

 

रक्षाबंधन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 55 महिलाओं को ट्विटर पर किया फॉलो

दिल्‍ली में मौजूद थे केंद्रीय मंत्री
सोमवार सुबह देहरादून से जैव ईंधन से उड़ान भरने वाला विमान नई दिल्ली में टर्मिनल 2 आईजीआई (इंदिरा गांधी इंटेल हवाई अड्डे) पर उतरा. इस दौरान वहां पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, नितिन गडकरी, सुरेश प्रभु और अन्य लोग उपस्थित थे.

भारतीय आसमान में जल्द दिख सकता है जैव ईंधन से उड़ने वाला विमान, सोमवार को होगा परीक्षण

पहली जैव जेट ईंधन की उड़ान का सफलता से परिचालन
एयरलाइन ने कहा कि उसने पहली जैव जेट ईंधन की उड़ान का सफलता से परिचालन पूरा किया. इस उड़ान के लिए इस्तेमाल ईंधन 75 प्रतिशत एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) और 25 प्रतिशत जैव जेट ईंधन का मिश्रण था. एयरलाइन में बयान में कहा कि एटीएफ की तुलना में जैवजेट ईंधन इस्तेमाल का फायदा यह है कि इससे कॉर्बन उत्सर्जन घटता है और साथ ही ईंधन दक्षता भी बढ़ती है. स्पाइसजेट ने कहा कि जट्रोफा फसल से बने इस ईंधन का विकास सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून ने किया है. परीक्षण उड़ान पर करीब 20 लोग सवार थे. इनमें नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और स्पाइसजेट के अधिकारी शामिल रहे. एयरलाइन के एक अधिकारी ने बताया कि यह उड़ान करीब 25 मिनट की थी.

लोकसभा चुनाव 2019: अगले आम चुनाव को लेकर उत्तरप्रदेश में छोटे दलों की जोर-आजमाइश

जैव जेट ईंधन की लागत कम बैठती है: चेयरमैन, स्‍पाइसजेट
स्पाइसजेट के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अजय सिंह ने कहा कि जैव जेट ईंधन की लागत कम बैठती है और साथ ही यह उल्लेखनीय रूप से कॉर्बन उत्सर्जन घटाने में मदद करता है. उन्होंने कहा कि इसमें हमारी परंपरागत विमान ईंधन पर प्रत्येक उड़ान में निर्भरता में करीब 50 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है। इससे किराये में भी कमी आएगी. जैव जेट ईंधन को अमेरिकी मानक परीक्षण प्रणाली (एएसटीएम) से मान्यता है और यह विमान में प्रैट एंड व्हिटनी तथा बॉम्बार्डियर के वाणिज्यिक एप्लिकेशन के मानदंडों को पूरा करता है। क्यू400 विमान में 78 सीटें हैं. एयरलाइंस कंपनियों के वैश्विक निकाय आईएटीए के अनुसार वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में विमानन उद्योग का हिस्सा दो प्रतिशत बैठता है.