अलीगढ़: भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य रह चुके जफर इकबाल ने उनके द्वारा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) का नाम बदलने की हिमायत करने की खबरों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है.

एएमयू के छात्र रहे चुके इकबाल ने आज कहा कि मीडिया में प्रचारित हो रहा है कि उन्होंने एएमयू का नाम बदलने की मांग का समर्थन नहीं किया. मीडिया में उनके नाम से गलत बातें फैलायी जा रही हैं. उन्होंने कहा कि वह इस बात से दुखी हैं कि कुछ राजनीतिक ताकतें एएमयू को सिर्फ इसलिये बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं, क्योंकि उसके नाम में मुस्लिम शब्द जुड़ा है. एएमयू ने दुनिया को हर क्षेत्र में जबर्दस्त उपलब्धियां हासिल करने वाली हस्तियां दी हैं. इकबाल ने कहा कि उन्हें भारत, उसके राष्ट्रीय खेल हॉकी और एएमयू से बेइंतहा मुहब्बत है. आखिर कोई यह कैसे सोच भी सकता है कि मैं महज मुस्लिम शब्द हटा देने से एएमयू की मुसीबतें खत्म हो जाने की बात करूंगा. मैंने भाईचारे और राष्ट्रवाद का सबक इसी एएमयू से सीखा है, जहां कभी हिन्दू और मुस्लिम के भेदभाव की रत्ती भर जगह नहीं रही.

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बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया: इकबाल
अपने साथ जुड़े ताजा विवाद के बारे में सफाई देते हुए पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान ने कहा कि पिछले सप्ताह किसी पत्रकार ने एएमयू से शिक्षाप्राप्त महान हॉकी खिलाड़ियों के नाम जानने के लिये उन्हें फोन किया था. इस दौरान पत्रकार ने उनसे एएमयू के बार-बार विवादों में फंसने के कारण के बारे में पूछा था.

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इकबाल ने बताया कि उन्होंने जवाब दिया था कि एएमयू को विवादों में लाने के पीछे पूर्वाग्रह की भावना है. उन्हें दुख है कि एएमयू को लेकर पहले जो सम्मान था, अब उसकी जगह संदेह और असहिष्णुता ने जगह ले ली है. कुछ लोगों ने महज मुस्लिम शब्द जुड़ा होने की वजह से ही एएमयू पर हमलावर होने की आदत पाल ली है. उन्होंने कहा कि उनके इसी बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, जिसकी वह निंदा करते हैं. (इनपुट एजेंसी)