गोमती रिवर फ्रंट से JPNIC तक...सपा सरकार के 'घोटालों' की याद दिला रहे ओपी राजभर
पिछले कुछ दिनों से राजभर ने एक के बाद एक कई सोशल मीडिया पोस्ट कर अखिलेश यादव के कार्यकाल की परियोजनाओं और फैसलों को निशाने पर लिया है. सपा सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार को मुद्दा बना लिया है.
भावेष पांडेय | योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर इन दिनों समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के खिलाफ सोशल मीडिया पर लगातार मोर्चा खोले हुए हैं. सपा सरकार में कानून-व्यवस्था, जातीय हिंसा और PDA को लेकर वो लगातार सवाल उठाते रहे हैं. पिछले कुछ दिनों से राजभर ने एक के बाद एक कई सोशल मीडिया पोस्ट कर अखिलेश यादव के कार्यकाल की परियोजनाओं और फैसलों को निशाने पर लिया है. सपा सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार को मुद्दा बना लिया है. इन पोस्टों में उन्होंने गोमती रिवर फ्रंट, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, जेपीएनआईसी (जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर) और कन्नौज में सांसद निधि के खर्च को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं.
गोमती रिवर फ्रंट पर क्या कहा?
राजभर ने हाल ही में अपने एक पोस्ट में आरोप लगाया कि गोमती रिवर फ्रंट परियोजना का पैसा 2017 के विधानसभा चुनाव में खर्च किया गया. उनका दावा है कि परियोजना का पूरा बजट खर्च दिखाया गया, लेकिन केवल लगभग 60 फीसदी काम ही पूरा हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि बाकी राशि का इस्तेमाल चुनाव और सैफई परिवार के हितों के लिए किया गया. राजभर ने यह भी दावा किया कि नोटबंदी की वजह से समाजवादी पार्टी पर कुछ संसाधनों का इस्तेमाल नहीं कर सकी, जिसके कारण सत्ता में वापसी की उसकी योजना सफल नहीं हुई. उन्होंने कहा कि गोमती रिवर फ्रंट से जुड़े मामलों की जांच एजेंसियां कर रही हैं और सच सामने आएगा.
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भी लगाए आरोप
एक अन्य पोस्ट में राजभर ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर भी समाजवादी पार्टी सरकार को घेरा. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी की गई और निजी लाभ के लिए एक्सप्रेसवे के रूट में बदलाव किया गया. राजभर का दावा है कि एक्सप्रेसवे के आसपास जमीन खरीद, मुआवजे और रूट निर्धारण में अनियमितताएं हुईं, जिससे कुछ लोगों को फायदा पहुंचा. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जल्दबाजी में किए गए निर्माण की वजह से यह एक्सप्रेसवे दुर्घटनाओं के लिए बदनाम हो गया.
JPNIC को बताया भ्रष्टाचार का प्रतीक
राजभर ने लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर भी अखिलेश यादव पर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस परियोजना की शुरुआती लागत करीब 200 करोड़ रुपये थी, उसकी लागत बढ़ाकर लगभग 860 करोड़ रुपये तक पहुंचा दी गई, जबकि परियोजना पूरी भी नहीं हो सकी. उन्होंने लिखा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसे सम्मानित नेता के नाम पर बनी परियोजना में भ्रष्टाचार नहीं होना चाहिए था. राजभर ने दावा किया कि इसी कारण समाजवादी पार्टी लंबे समय से सत्ता से बाहर है.
सांसद निधि के खर्च पर भी उठाए सवाल
राजभर ने एक अन्य पोस्ट में अखिलेश यादव के कन्नौज संसदीय क्षेत्र में सांसद निधि के खर्च को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों में सभी वर्गों को समान प्राथमिकता नहीं दी गई। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर गैर-यादव पिछड़ों और दलितों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया. पोस्ट में उन्होंने पाल, प्रजापति, बिंद, केवट, मल्लाह, राजभर, निषाद, मांझी, तेली समेत कई अति पिछड़ी जातियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी की नीतियों का सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं वर्गों को हुआ.
'एक-एक कर सारे चिट्ठे खोलूंगा'
राजभर अपनी पोस्ट में लगातार ये दावा कर रहे हैं कि उनके पास सपा सरकार के भ्रष्टाचार से जुड़ी पूरी जानकारी है और वह एक-एक कर सभी मुद्दों को सामने लाएंगे. उन्होंने दावा किया कि संबंधित एजेंसियां इन मामलों की जांच कर रही हैं और सच्चाई सामने आएगी. गौरतलब है कि ओमप्रकाश राजभर पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया के जरिए लगातार समाजवादी पार्टी पर हमलावर हैं. कभी वह PDA, जातीय हिंसा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे उठाते हैं तो कभी अखिलेश यादव सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर सवाल खड़े करते हैं.
(लेखक इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में वकील हैं. सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर लेखन करते हैं.)
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