लखनऊ: शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात लखनऊ के गोमतीनगर में एक मल्टीनेशनल कर्मचारी की हत्या मामले में विवाद गहराता जा रहा है. आरोप है कि यूपी पुलिस के सिपाही ने निर्दोष व्यक्ति पर गोली चला दी. इस बीच उत्तर प्रदेश के मंत्री धर्मपाल सिंह ने विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि गोली जिसे लगी है, वह वास्तव में अपराधी था. वहीं, गोली चलाने के आरोपी पुलिसकर्मी ने कहा है कि उसकी एफआईआर तक दर्ज नहीं की जा रही. वहीं, उत्तर प्रदेश के एक अन्य मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा है कि आरोपी पुलिसकर्मी को बर्खास्त कर दिया गया है और मामले की पड़ताल के एसआईटी के गठन का आदेश दिया गया है.

घटना के बारे में पूछे जाने पर मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि इनकाउंटर में ऐसी कोई गलती नहीं हुई है. गोली उसी को लगी है जो वास्तव में अपराधी था. जो गलती करेगा, उसको दंड मिलेगा.

घटना के दौरान मृतक विवेक तिवारी के साथ मौजूद महिला ने कहा है कि हमारी कार कहीं रुकी नहीं थी बल्कि चल रही थी. पुलिसवाला अचानक रॉन्ग साइड से आया और हमारी ओर चिल्लाने लगा. इसका कारण यही था कि कार में उसे एक महिला बैठी दिखी थी.

इधर, कथित रूप से गोली चलाने के आरोपी पुलिसकर्मी प्रशांत चौधरी ने कहा है कि मैंने उस पर गोली नहीं चलाई. गोली गलती से चली. इससे पहले उसने तीन बार मुझ पर कार चढ़ाने की कोशिश की थी. उसका इरादा मेरी हत्या करना था.

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आरोपी पुलिसकर्मी की पत्नी ने सरकार से सवाल किया कि हमारी एफआईआर तक दर्ज नहीं की जा रही है. क्या हमारे जीवन का कोई मूल्य नहीं है. उसने सरकार से तत्काल शिकायत दर्ज करने की मांग भी की.

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मामले पर बढ़ते हंगामे को देख यूपी सरकार ने इसकी पड़ताल के लिए विशेष जांच दल का गठन किया है. मंत्री आशुतोष टंडन ने बताया कि दोबारा एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं. मामले की जांच की जिम्मेदारी गोमतीनगर पुलिस के पास नहीं होगी. लखनऊ के डीएम ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं जबकि सरकार ने एसआइ्रटी का गठन किया है. दोषी पुलिसकर्मी को गिरफ्तार कर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है.