UP वालों के लिए खुशखबरी- घर-दुकान का नक्शा पास कराने के लिए नहीं काटने होंगे अथॉरिटी के चक्कर, घर बैठे होगा पास

यह नया सिस्टम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की डिजिटल इंडिया और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की नीति का हिस्सा है. पहले नक्शा पास कराने में महीनों लग जाते थे, रिश्वतखोरी और दफ्तरों के चक्कर आम थे. अब समय की बचत होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और लागत भी कम आएगी.

Written by: Farha Fatima
Published: January 2, 2026, 12:01 PM IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में घर या दुकान बनाने वालों के लिए नया साल 2026 बड़ी राहत लेकर आया है. लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने नए बिल्डिंग बायलॉज के तहत ‘फास्ट ट्रैक सिस्टम’ नाम से ‘फास्टपास’ (FASTPAS) लागू कर दिया है. इस सिस्टम के जरिए अब छोटे आवासीय और व्यावसायिक भवनों का भवन मानचित्र (नक्शा) ऑनलाइन एक क्लिक में पास हो जाएगा. लोगों को LDA दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह जानकारी LDA ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल से साझा की है, जिससे लाखों नागरिकों में उत्साह है.

फास्टपास क्या है और कैसे काम करता है?

फास्टपास एक ऑटोमेटेड डिजिटल सॉफ्टवेयर है, जो भवन मानचित्र की स्वीकृति को तेज और पारदर्शी बनाता है. छोटे प्लॉट्स के लिए संपत्ति मालिक खुद या रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट के माध्यम से नक्शा अपलोड कर सकते हैं. सिस्टम स्वचालित रूप से बिल्डिंग बायलॉज के मानकों (जैसे सेटबैक, कवर्ड एरिया, पार्किंग, सड़क चौड़ाई आदि) की जांच करता है. अगर सब कुछ ठीक हुआ तो कुछ ही मिनटों में अप्रूवल सर्टिफिकेट जारी हो जाता है. यह सुविधा मुख्य रूप से 100 वर्ग मीटर (लगभग 1076 वर्ग फुट) तक के आवासीय भवनों और 30 वर्ग मीटर तक के व्यावसायिक भवनों के लिए है. बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए अभी पुरानी प्रक्रिया जारी रहेगी.

आवेदन कैसे करें?

  • आवेदन की प्रक्रिया बेहद सरल है. सबसे पहले पोर्टल map.up.gov.in पर जाएं.
  • नया अकाउंट बनाएं या लॉगिन करें.
  • आधार ई-केवाईसी अनिवार्य है, जो धोखाधड़ी रोकने के लिए लागू की गई है.
  • भूखंड का विवरण (लैंड यूज, खसरा नंबर, लोकेशन आदि) भरें.
  • रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट से तैयार करवाया गया नक्शा (ऑटो कैड फॉर्मेट में) अपलोड करें. सिस्टम द्वारा
  • कैलकुलेटेड फीस ऑनलाइन जमा करें.
  • सबमिट करते ही ऑटो-चेक होगा और अप्रूवल मिल जाएगा.

पूरा प्रोसेस घर बैठे पूरा हो सकता है. अगर कोई गड़बड़ी हुई तो आपत्ति आएगी, जिसे सुधारकर दोबारा सबमिट करना होगा. गलत जानकारी देने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी है.

इस सिस्टम के फायदे

पहले आर्किटेक्ट फीस और अन्य खर्चे 40-50 हजार तक पहुंच जाते थे, अब यह 5-7 हजार में हो सकता है. छोटे प्लॉट मालिकों, मध्यम वर्ग और व्यावसायिक दुकानदारों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. साथ ही, अवैध निर्माण पर अंकुश लगेगा क्योंकि सही मानचित्र अनिवार्य रहेगा.

किन बातों का रखें ध्यान?

आवेदन करते समय भूखंड का लैंड यूज मास्टर प्लान से मैच करना चाहिए. सड़क की चौड़ाई, फ्रंट/साइड/रियर सेटबैक, FAR (फ्लोर एरिया रेशियो), पार्किंग आदि का सटीक विवरण देना जरूरी है. आधार सत्यापन और ई-केवाईसी पूरा करें. पोर्टल पर नवीनतम अपडेट चेक करते रहें. अगर प्लॉट बड़ा है या विशेष नियम लागू हैं, तो LDA हेल्पलाइन या वेबसाइट से संपर्क करें.

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