इलाहाबाद। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शामली जिले के गुलफाम मलिक और मुनव्वर की याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उनके अभिभावकों से संरक्षण प्रदान करने की मांग की गयी थी. दोनों अच्छे दोस्त हैं और जीवनसाथी के रूप में एक दूसरे के साथ रहते हैं. उनका आरोप है कि उनके माता पिता उन्हें अलग होने के लिए धमका रहे हैं.

कोर्ट ने बताया सामाजिक समस्या

न्यायमूर्ति पंकज मिताल और न्यायमूर्ति मुख्तार अहमद की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को उनके माता-पिता से सुरक्षा देने से मना कर दिया और उनकी याचिका खारिज कर दी. अदालत ने कहा कि चूंकि यह एक सामाजिक समस्या है, वह ऐसे मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती.

दोनों के पिता दे रहे धमकी

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि दोनों के पिता धमकी दे रहे हैं कि अगर उन्होंने एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया था कि उनके माता पिता और पुलिस को शांतिपूर्ण ढंग से चल रही उनकी जिंदगी में दखल नहीं देने का निर्देश जारी किया जाए.

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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक निर्णय में समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था. अदालत ने धारा 377 खारिज कर दिया था जिससे एलजीबीटी समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई थी. इस फैसले के बाद भारत उन कुछ चुनींदा देशों में शामिल हो गया था जहां समलैंगिक संबंधों को मान्यता मिली हुई है.