Gyanvapi Case Update Setback To Hindu Side Varanasi Court Dismisses Petition For Asi Survey
Gyanvapi मामले में हिंदू पक्ष को झटका, परिसर के बाकी बचे हिस्सों का नहीं होगा सर्वे- कोर्ट ने खारिज की याचिका
Gyanvapi Case Update: ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष को बड़ा झटका लगा है. वाराणसी की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर के बचे हुए हिस्सों के ASI सर्वे की इजाजत नहीं दी.
Gyanvapi Case Update: ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष को बड़ा झटका लगा है. वाराणसी की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर के बचे हुए हिस्सों के ASI सर्वे की इजाजत नहीं दी. हिंदू पक्ष ने याचिका में यह तर्क दिया था कि मस्जिद के मुख्य गुंबद के नीचे आदि विशेश्वर का शिवलिंग है इसलिए वजुखाना में शिवलिंग समेत पूरे क्षेत्र ASI सर्वे की आवश्यकता है. याचिका में तर्क दिया गया था कि पिछली जांच अधूरी थी इसलिए पूरे परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा पूरी जांच की आवश्यकता थी.
हिंदू पक्षकार विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि जिस क्षेत्र में शिवलिंग होने का दावा हिंदू पक्ष कर रहा है, पिछली बार उस क्षेत्र का सर्वेक्षण नहीं किया गया था. इसलिए पूरे ज्ञानवापी परिसर की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से सर्वेक्षण कराए जाने की आवश्यकता है.
#WATCH वाराणसी, उत्तर प्रदेश: ज्ञानवापी मामले पर हिंदू पक्ष के वकील विजय शंकर रस्तोगी ने कहा, “न्यायालय ने एएसआई द्वारा पूरे ज्ञानवापी क्षेत्र की सुरक्षा के अतिरिक्त सर्वेक्षण के हमारे आवेदन को खारिज कर दिया है… हम इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय जाएंगे….” pic.twitter.com/OdTopoDV2B
हिंदू पक्ष के वकील विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि हम इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे. न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए विजय शंकर रस्तोगी ने कहा, ‘न्यायालय ने ASI द्वारा पूरे ज्ञानवापी क्षेत्र की सुरक्षा के अतिरिक्त सर्वेक्षण के हमारे आवेदन को खारिज कर दिया है… हम इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे… ‘
जिला अदालत के 21 जुलाई, 2023 के आदेश के बाद, ASI ने यह निर्धारित करने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया कि क्या मस्जिद का निर्माण हिंदू मंदिर के पहले से मौजूद ढांचे के ऊपर किया गया था? ASI ने 18 दिसंबर 2023 को एक सीलबंद लिफाफे में जिला अदालत को अपनी सर्वेक्षण रिपोर्ट सौंपी थी. हिंदू याचिकाकर्ताओं द्वारा दावा किए जाने के बाद अदालत ने सर्वेक्षण का आदेश दिया था कि क्या 17वीं सदी की मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर के अवशेषों के ऊपर किया गया था.
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