Hathras Updates: हाथरस मामले को लेकर पूरे देश में आक्रोश है. इसे लेकर योगी सरकार भी विपक्षी पार्टियों के निशाने पर है. कथित तौर पर गैंगरेप और मारपीट के बाद हाथरस की 19 वर्षीय दलित युवती की मौत के बाद देशभर में चहुंओर इसी मामले पर चर्चा चल रही है. मामले को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस भी आलोचनाएं झेल रही हैं. अब यूपी पुलिस ने हाथरस मामले में 19 एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं. इनमें देशद्रोह, अंतरराष्ट्रीय साजिश और धार्मिक नफरत फैलाने जैसे आरोप लगाए गए हैं.Also Read - Rajasthan: T20 वर्ल्‍ड कप मैच में पाक की जीत पर खुशी मनाने वाली टीचर अरेस्‍ट

हाथरस जिले के चंदपा थाने में ‘अज्ञात लोगों’ के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कहा गया है कि उन्होंने जातिगत संघर्ष भड़काने, समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और सरकार की छवि खराब करने की कोशिश की है, साथ ही इन सभी के खिलाफ राजद्रोह (124ए) का मामला भी दर्ज किया गया है. रविवार की दोपहर में दर्ज हुई प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की 18 अन्य धाराओं और आईटी कानून की एक धारा का भी जिक्र है. Also Read - यूपी पुलिस ने T20 वर्ल्‍ड कप मैच में पाक टीम की जीत का जश्‍न मनाने पर 7 लोगों को बुक किया

राज्य के ADG (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने कहा कि ये FIR पूरे यूपी में दर्ज की गई हैं. उन्होंने कहा कि हाथरस के अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में छह मामले, बिजनौर, सहारनपुर, बुलंदशहर, इलाहाबाद, अयोध्या और लखनऊ में 13 और FIR दर्ज की गई हैं. इन प्राथमिकियों में सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट का भी जिक्र है. Also Read - बहु पर ऐसी बिगड़ी ससुर की नीयत, परेशान बेटे को करनी पड़ी सुसाइड, फिर भी...

इससे पहले भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘हालिया घटनाओं’ के संदर्भ में कहा था कि ‘अराजक तत्व’ राज्य में साम्प्रदायिक और जातिगत हिंसा भड़काना चाहते हैं.

उधर, भारत में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ यौन अपराध की घटनाओं पर ध्यान आकर्षित करते हुए संयुक्त राष्ट्र की स्थाई समन्वयक रेनाटा डेसालिएन ने कहा कि हाथरस और बलरामपुर में हुई कथित सामूहिक बलात्कार और हत्या की घटनाएं यह बताती हैं कि समाज के वंचित तबके के लोगों को लिंग आधारित हिंसा/अपराध का खतरा ज्यादा है. उनके बयान के अनुसार, ‘भारत में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ लगातार हो रही यौन हिंसा को लेकर संयुक्त राष्ट्र दुखी और चिंतित है.’

वहीं विदेश मंत्रालय ने इस बयान को ‘अनावश्यक’ करार देते हुए कहा, ‘भारत में संयुक्त राष्ट्र की स्थाई समन्वयक को यह ज्ञात होना चाहिए कि सरकार ने इन मामलों को बहुत गंभीरता से लिया है.’ मंत्रालय ने कहा, ‘चूंकि जांच प्रक्रिया जारी है, बाहरी एजेंसी की किसी भी गैरजरूरी टिप्पणी को नजरअंदाज करना ही बेहतर है.’

(इनपुट: भाषा)