Hathras Case: हाथरस मामले में हर दिन कोई न कोई तथ्य सामने आए रहे हैं. आलोचनाओं का सामना कर रही यूपी पुलिस ने मामले को लेकर पूरे राज्य में 19 FIR दर्ज की है. इनमें एक FIR काफी अहम है. इस FIR में बड़ी आपराधिक साजिश की बात की गई है. इसमें कहा गया है कि ‘एक पूरी सुनियोजित आपराधिक साज़िश के तहत पीड़ित के परिवार को बरगलया गया. इसके साथ-साथ कुछ अराजक तत्वों ने पीड़ित परिवार को प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ गलतबयानी करने के लिए 50 लाख का लालच भी दिया.’ Also Read - Hathras case Latest Updates: कहां तक पहुंची हाथरस मामले की सीबीआई जांच? अब आरोपियों की बारी

हाथरस के चांदपा थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, कुछ असामाजिक तत्व कानून और व्यवस्था को बाधित करना और राज्य में कानूनी रूप से स्थापित सरकार की छवि को खराब करने का प्रयास कर रहे थे. इसमें कहा गया कि पीड़ित परिवार पर बार-बार ये दबाव बनाया गया कि वह कहे कि गैंगरेप हुआ था, जबकि पहली शिकायत में पीड़ित परिवार ने मारपीट की बात की थी. FIR में साथ ही यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार की छवि खराब कर पूरे प्रदेश में सनसनी फैलाने का प्रयास किया गया और अमन-चैन छिन्न भिन्न करने का प्रयास किया गया. Also Read - रेप का अजीबो-गरीब मामला- 6 साल के लड़के पर साढ़े पांच साल की बच्ची से बलात्कार का आरोप

उधर, हाथरस मामले की आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आखिर वह क्या वजह थी, जिसके कारण कथित तौर पर हैवानियत की शिकार हुई 19 साल की दलित लड़की का अंतिम संस्कार देर रात कर दिया गया. यूपी सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि इस घटना की सच्चाई सामने लाने के लिए सरकार निष्पक्ष जांच के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अपनी निगरानी में हाथरस में कथित गैंगरेप और मौत मामेल की सीबीआई जांच के निर्देश देने चाहिए. Also Read - बुलगड़ी गांव छोड़ना चाहता है हाथरस पीड़िता का परिवार, घर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात

सरकार ने गुहार लगाई कि सुप्रीम कोर्ट को हाथरस में कथित गैंगरेप और मौत मामले की सीबीआई जांच के निर्देश देने चाहिए. यूपी सरकार ने कहा कि वह मामले की निष्पक्ष जांच कर सकती है लेकिन ‘निहित स्वार्थ’ निष्पक्ष जांच को पटरी से उतारने के मकसद से प्रयास कर रहे हैं.

(इनपुट: ANI)