लखनऊः राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रात में हुई हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश को हाई अलर्ट पर रखा गया है. ईरानी मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या और पाकिस्तान में ननकाना साहिब गुरुद्वारा पर हमले को लेकर राज्य में पहले से ही विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर लोगों की नाराजगी अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है. अब इस घटना ने एक बार फिर से लोगों में गुस्सा पैदा कर दिया है.

शीर्ष अधिकारियों ने पहले ही जिले के पुलिस प्रमुखों को सतर्क रहने और राज्य में शैक्षणिक संस्थानों के परिसरों पर गतिविधियों की बारीकी से निगरानी करने के लिए कहा है. अधिकांश विश्वविद्यालयों और संस्थानों को, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) को छोड़कर, जो अनिश्चितकाल के लिए बंद है, सोमवार को खोलना निर्धारित किया गया है.

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ये वे संस्थान हैं, जिन्होंने पिछले महीने दिल्ली में जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था. जामिया के छात्रों के समर्थन में छात्रों के प्रदर्शन के बाद एएमयू पर खासकर नजर रखी जा रही है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भी छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है, जहां कुलपति प्रोफेसर रतन लाल हंगलू को चार दिन पहले इस्तीफा देना पड़ा. विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर और पीआरओ ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह सामुदायिक राजनीति का एक बहुत खतरनाक मुद्दा बन गया है. लगभग हर जिले में हम कई मुद्दों पर असंतोष का सामना कर रहे हैं. सीएए को लेकर नाराजगी जारी है. शिया मुस्लिम ईरान की सेना के जनरल की हत्या और सिख पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा ननकाना साहिब पर हमले से बेचैन हैं. सीएए विरोधी प्रदर्शनों के खिलाफ हाल की कार्रवाई से छात्र भी परेशान हैं. वर्तमान में, यह स्थिति निस्संदेह अस्थिर है.”

उत्तर प्रदेश के डीजीपी ओ.पी. सिंह ने कहा, “हम सतर्कता बढ़ा रहे हैं और सभी जिला पुलिस प्रमुखों को मौजूदा स्थिति को देखते हुए हाई अलर्ट पर रहने को कहा है.”