लखनऊ/देहरादून: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पद छोड़ने के वर्षों बाद भी सरकारी घरों को अपने कब्जे में रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्रियों से पर्याप्त किराया न वसूले जाने के संबध में दायर एक जनहित याचिका पर पूर्व में जारी नोटिसों का कोई जवाब न देने पर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी को नोटिस जारी किया है. Also Read - आयुर्वेदिक डॉक्टर ने कोर्ट में दाखिल की PIL, बोला- मिल गया कोरोना का इलाज, तो कोर्ट ने लगाया जुर्माना

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रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजे गये पूर्व नोटिसों का खंडूरी द्वारा कोई जवाब न दिये जाने पर सख्त रूख अपनाते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने उन्हें यह नोटिस व्यक्तिगत रूप से दिये जाने के निर्देश दिये. याचिकाकर्ता के वकील कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि खंडपीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री को नोटिस का जवाब देने के लिए दस दिन का समय देते हुए कहा कि इसमें विफल रहने पर अदालत को इस नोटिस को पेपर में छपवाना पड़ेगा. Also Read - ट्यूशन फीस माफ करने को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर, जानिए क्या है पूरा मामला 

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एक हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से लिया गया किराया

याचिका के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्रियों से पर्याप्त किराया नहीं वसूला गया और उनसे एक हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से किराया लिया गया जो वर्तमान बाजार भाव से काफी कम है. अधिवक्ता गुप्ता ने कहा कि किराये का निर्धारण गैरकानूनी ढंग से 2004 के एक शासनादेश तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाल में असंवैधानिक घोषित किये गये 1997 के नियमों के आधार पर किया गया है. याचिकाकर्ता ने पूर्व मुख्यमंत्रियों विजय बहुगुणा और रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा मामूली किराया अदा किये जाने पर भी आपत्ति प्रकट की और कहा कि उनके द्वारा किया गया भुगतान उच्चतम न्यायालय के उस आदेश के मुताबिक नहीं है जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों से ‘उचित किराया’ वसूले जाने के निर्देश दिये गये हैं.

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हाईकोर्ट ने बाजार भाव पर किराये का निर्धारण करने को कहा था

उच्च न्यायालय ने भी पिछले वर्ष 16 फरवरी को दिये अपने आदेश में राज्य सरकार को बाजार भाव पर किराये का निर्धारण करने के निर्देश दिये थे जो सरकार अब तक नहीं कर पायी है. अदालत ने यह साफ किया कि यह जनता का धन है और इसे वसूला जाना चाहिए. याचिका में शामिल किये गये खंडूरी सहित सभी पूर्व मुख्यमंत्री उच्च न्यायालय के दखल के बाद सरकारी आवास खाली कर चुके हैं. (इनपुट एजेंसी)