Historic Surya Kovidar Flag To Be Hoisted On Ram Temple Shikhar In Ayodhya On Vivah Panchami
फिर से दुल्हन की तरह सजी है पूरी अयोध्या, PM मोदी 8000 अतिथि के सामने राम मंदिर पर करेंगे एक और खास काम, जानिए क्या है पूरा मामला
विवाह पंचमी के पावन अवसर पर अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर पहली बार विशेष सूर्य-कोविदार चिन्हित केसरिया ध्वज फहराने की तैयारी पूरी हो गई है, जिसे एक ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक क्षण माना जा रहा है.
25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी के अवसर पर अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में एक ऐतिहासिक ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें मंदिर के मुख्य शिखर पर विशेष केसरिया ध्वज फहराया जाएगा; इस ध्वज को “सूर्य-कोविदार चिन्हित ध्वज” कहा जा रहा है क्योंकि इसमें भगवान राम के सूर्यवंशी वंश का प्रतीक सूर्यदेव, श्रीरामराज्य की समृद्धि और शक्ति का प्रतीक कोविदार वृक्ष, ॐ का चिह्न अंकित रहेगा. ध्वज लगभग 22×11 फुट का होगा और इसे 42 फुट ऊँचे ध्वजदंड पर लगाया जाएगा. कार्यक्रम का शुभ मुहूर्त दोपहर 11:58 से 1:00 बजे के बीच निर्धारित है और इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ध्वजारोहण करेंगे, उनके साथ RSS प्रमुख मोहन भागवत सहित लगभग 6,000–8,000 विशेष अतिथि उपस्थित होंगे.
आम दर्शनार्थियों के लिए 24 नवंबर की रात से दर्शन बंद
यह ध्वज सिर्फ एक प्रतीकात्मक झंडा नहीं, बल्कि धर्म-संस्कृति, आस्था और श्रेष्ठता का संवाहक माना जा रहा है. आम दर्शनार्थियों के लिए 24 नवंबर की रात से दर्शन बंद किये जाएंगे ताकि अनुष्ठान एवं सुरक्षा-तैयारी शांतिपूर्वक हो सके. मंदिर निर्माण समिति ने बताया है कि अधिकांश प्रमुख निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और इस ध्वजारोहण को मंदिर निर्माण की “पूर्णता” तथा आस्था-सपने की पूर्ति का प्रतीक माना जा रहा है.
शिखर पर ध्वज मंदिर की शक्ति का प्रतीक
शिखर पर ध्वज फहराना सिर्फ एक रस्म नहीं है. हिन्दू धार्मिक परंपरा के अनुसार, मंदिर के शिखर पर ध्वज स्थापित करना उस मंदिर की शक्ति, रक्षा-चेतना और भक्तों की आस्था का प्रतीक माना जाता है. विशेष रूप से, यह आयोजन विवाह पंचमी के साथ जुड़ा है. माना जाता है कि त्रेतायुग में भगवान राम और माता सीता का विवाह इसी दिन हुआ था.
25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी जैसे पावन दिन पर, राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर यह विशेष केसरिया ध्वज फहराना भक्त-समुदाय के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है.
सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च स्तर पर रखते हुए अयोध्या एयरपोर्ट पर VVIP मूवमेंट के लिए विशेष विमान-उपकरण और हाई-अलर्ट प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं. आम श्रद्धालुओं के लिए राम मंदिर का दर्शन 26 नवंबर की सुबह से पुनः खोला जाएगा ; इससे पहले ध्वज फहराने की तकनीकी ट्रायल भी पूरी की जा चुकी है.
भगवान राम और माता सीता का विवाह इसी दिन हुआ था
विवाह पंचमी का यह दिन इसलिए भी विशेष है क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि पर त्रेतायुग में भगवान राम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ था, इसलिए इस अवसर पर मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराना रामलला के राजतिलक, मंदिर-निर्माण की पूर्णता और सनातन परंपरा के पुनर्जीवन का प्रतीक माना जा रहा है. इस आयोजन को अयोध्या में मंदिर उद्घाटन (22 जनवरी 2024) के बाद दूसरी सबसे बड़े ऐतिहासिक आयोजन के रूप में देखा जा रहा है, जिसके लिए पूरे शहर में सजावट, विशेष प्रकाश-सज्जा, सुरक्षा घेरा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तृत तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं.
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