नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के कानपुर (kanpur) जिले में ब्रहस्पतिवार और शुक्रवार की रात को एक बड़ी घटना हुई जिसमें आठ पुलिस कर्मियों की जान चली गई. यूपी पुलिस के आठ जवान देर रात हिस्ट्री शीटर विकास दुबे (History sheeter Vikas Dubey)को पकड़ने के लिए गए हुए थे,लेकिन बदमाशों को पहले से ही पुलिस के आने की भनक लग चुकी थी. इसी के चलते बदमाशों ने पुलिस के रास्ते में अवरोध उत्पन्न कर दिया था जिसे ठीक करने के लिए जब पुलिस के जवान उतरे तो उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी गई. इस घटना में 8 लोग मारे गए. आइए जानते हैं कि आखिर कौन है विकास दुबे जिसे पकड़ने के लिए पूरा पुलिस महकमा लगा हुआ है. Also Read - विकास दुबे के गांव में दबिश देने से पहले का पुलिस का ऑडियो अब हुआ वायरल, पूर्व SSP की बढ़ेगी मुसीबत

ऐसा नहीं है कि विकास दुबे का यह पहला मामला है. विकास दुबे का पुराना आपराधिक इतिहास (Vikas Dubey Criminal Record) रहा है. बचपन से ही विकास जुर्म की दुनिया का बादशाह बनना चाहता था और उसने इसकी शुरूआत भी पहले से ही कर दी थी. उसने पहले गैंग बनाया फिर लूट पाट शुरू की. इतने में ही उसका मन नहीं भरा तो बाद में वह डकैती और हत्याओं को भी अंजाम देने लगा. Also Read - UP Govt अब संजीत यादव अपहरण- मर्डर केस की CBI जांच के लिए करेगी सिफारिश

विकास ने 19 साल की उम्र में ही इतने कारनामों को अंजाम दे चुका था कि वह पुलिस प्रशासन की नजरों में पहले नंबर पर आ चुका था. जब उसने एक दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री की हत्या की थी तब वह मात्र 19 साल का था.  हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे साल 2001 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री संतोष शुक्ला हत्याकांड का मुख्य आरोपी है. इसके अलावा उसका नाम साल 2000 में कानपुर के शिवली थाना क्षेत्र में स्थित ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या में भी आया था. Also Read - लैब टेक्नीशियन की अपहण और मर्डर केस: अपर पुलिस अधीक्षक समेत 4 पुलिस अफसर सस्‍पेंड

साल 2004 में केबल व्यवसाई दिनेश दुबे की हत्या मामला सामने आया था और इस मामले में भी विकास दुबे का नाम जुड़ा था. विकास में हैवानियत इस कदर घर कर चुकी है कि अब उसे नहीं दिखता कि उसके सामने कौन है. उसने अपने जुर्म की छाप अपने घर पर भी छोड़ी है. 2018 में विकास ने अपने चचेरे भाई अनुराग पर भी हत्या के इरादे से हमला किया था. इसके बाद अनुराग की पत्नी ने विकास के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी. हत्या, लूट, फिरौती, किडनैपिंग जैसे कई गंभीर मामले विकास से जुड़े हुए हैं. विकास दुबे के खिलाफ इस समय 50 से अधिक गंभीर अपराध के मामले दर्ज हैं.

साल 2002 में जब मायावती सूबे की मुख्यमंत्री थीं तब इसका सिक्का बिल्हौर, शिवराजपुर, रिनयां, चौबेपुर के साथ ही कानपुर नगर में चलता था. इस दौरान विकास दुबे ने जमीनों पर अवैध कब्जे के साथ और गैर कानूनी तरीकों से संपत्ति बनाई. जुर्म की दुनिया में किसी ने कदम रखे हों और उसने राजनीति में हांथ न अजमाया हो ऐसा बहुत कम ही होगा. ताकत पाने की इच्छा से विकास ने भी राजनीति के दाव पेंच सीखे और जेल में रहने के दौरान उसने शिवराजपुर से नगर पंचयात का चुनाव जीत चुका है.