
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
सुहाग नगरी के नाम से मशहूर यूपी का फिरोजाबाद शहर अब चूड़ियों तक सीमित नहीं रहने वाला है. इस शहर को विश्व स्तरीय कांच कला और पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरने की तैयारी चल रही है. दरअसल, सीएम योगी की एक जिला–एक उत्पाद योजना को नई दिशा देने के उद्देश्य से यहां देश का पहला ग्लास म्यूजियम बनाया जा रहा है. लगभग 47.47 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा इस म्यूजियम का काम तेजी से चल रहा है और अब तक 60% से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. यह प्रोजेक्ट न केवल फिरोजाबाद को पहचान देगा, बल्कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी मजबूती देगा.
आपको बता दें कि फिरोजाबाद का कांच उद्योग यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. करीब 5 से 6 लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़े हुए हैं, जबकि 50 हजार से अधिक परिवार चूड़ी निर्माण और सजावटी कांच उत्पादों के काम में लगे हैं. यहां देश के MSME कांच उत्पादन का लगभग 70% हिस्सा तैयार होता है. जिले में 465 से ज्यादा सक्रिय औद्योगिक इकाइयां हैं, जहां पॉट फर्नेस, टैंक फर्नेस और मफल फर्नेस के जरिए विविध उत्पाद बनाए जाते हैं. हर साल करीब 1500 करोड़ रुपये के कांच उत्पादों का उत्पादन और निर्यात किया जाता है, जिनमें फ्लावर पॉट, क्रिसमस डेकोरेशन और ग्लास वुड आइटम प्रमुख हैं. ग्लास म्यूजियम का मकसद इन पारंपरिक कारीगरों की कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है.
डबराई क्षेत्र में विकास भवन के पास 25,700 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बन रहा यह ग्लास म्यूजियम आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा. इसमें 500 सीटों वाला भव्य ऑडिटोरियम, 150 सीटों का ओपन एयर थिएटर, आर्ट गैलरी, वॉच टावर, मल्टीपर्पज हॉल, कैफेटेरिया और पर्यटन सूचना केंद्र बनेगा. यह म्यूजियम पर्यटकों को कांच कला के इतिहास से लेकर आधुनिक तकनीकों तक का रोचक और ज्ञानवर्धक अनुभव देगा. यहां आने वाले लोग कांच बनाने की प्रक्रिया, उसकी बारीकियां और बदलती तकनीक को करीब से समझ सकेंगे, जिससे फिरोजाबाद की विरासत और भी सशक्त रूप में सामने आएगी.
इस म्यूजियम को गेम चेंजर के रूप में देख रहा है. ऑल इंडिया ग्लास मैन्युफैक्चरर फेडरेशन के पदाधिकारियों का मानना है कि अब तक कांच उद्योग को अपनी कला और क्षमता दिखाने के लिए कोई बड़ा मंच नहीं मिल पाया था. ग्लास म्यूजियम बनने से विदेशी खरीदारों, डिजाइनरों और निवेशकों को फिरोजाबाद की ताकत को समझने का मौका मिलेगा. इससे निर्यात बढ़ेगा, नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और स्थानीय युवाओं को भी लाभ मिलेगा. सीएम योगी का लक्ष्य फिरोजाबाद की पारंपरिक कांच कला को वैश्विक पहचान दिलाना है और यह म्यूजियम संस्कृति, पर्यटन और उद्योग के संगम के रूप में उस लक्ष्य को साकार करता नजर आ रहा है.
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