लखनऊ: उत्तर प्रदेश स्थित अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) से मोहम्मद जिन्ना की तस्वीर हटाए जाने का मुद्दा लगातार गर्माता जा रहा है. हिंदूवादी संगठनों एवं मुस्लिम संगठनों के आमने-सामने आने के बाद इस मामले में नया मोड़ आ गया है. प्रदेश के अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के मुताबिक, जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर जल्द ही एएमयू कार्यपरिषद में प्रस्ताव लाया जाएगा.

उप्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और एएमयू कार्यपरिषद के सदस्य तनवीर हैदर उस्मानी के मुताबिक, विश्वविद्यालय से जिन्ना की तस्वीर हटाने के लिए कार्यपरिषद में एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिन्ना की तस्वीर एएमयू में किसी भी सूरत में नहीं होनी चाहिए. इसके लिए जल्द कार्यवाही शुरू की जाएगी. गौरतलब है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीर को लेकर पिछले कई दिनों से बवाल मच रहा है. विश्‍वविद्यालय में मुस्लिम संगठनों एवं हिंदूवादी संगठनों की तरफ से प्रदर्शनों का अयोजन किया जा रहा है और लगातार नारेबाजी हो रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी स्पष्ट कर दिया था कि जिन्ना को इतना महत्व देने का कोई मतलब नहीं है. इसके बाद विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की ओर से जिन्ना की तस्वीर हटाने को लेकर प्रस्ताव लाने की कवायद शुरू की गई.

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ये था पूरा मामला
बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ हॉल में मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगी हुई है, जिस पर हिन्दुत्ववादी संगठनों की अप्पति के बाद से विवाद मचा हुआ है. भाजपा सांसद सतीश गौतम ने एएमयू वीसी को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा था कि यहां जिन्ना की तस्वीर क्यों लगाई गई. इसके बाद यहां विवाद शुरू हो गया. छात्रसंघ का कहना है कि जिन्ना भी इस यूनिवर्सिटी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. जिन्ना को लेकर चाहे कैसा भी ऐतिहासिक विवाद रहा हो, लेकिन एएमयू की स्थापना में उनका भी योगदान था. वहीं हिंदुत्ववादी समूहों का पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना की तस्वीर को हटाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव जारी है. इस मामले में पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के प्रेस सचिव रहे एसएम खान ने कहा था कि ये विश्विद्यालय प्रशासन के अंदरूनी मामला है इस पर बाहरियों को बोलने का कोई हक नहीं है.

(इनपुट आईएएनएस)