इटावा: ‘मुगल-ए-आज़म’ जैसी फिल्म बनाने वाले निर्देशक और प्रसिद्ध फिल्मकार के. आसिफ के नाम पर चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल हुआ. फिल्म महोत्सव में दिग्गज फिल्मी हस्तियां, साहित्यकार, फोटोग्राफर्स के साथ पान सिंह तोमर के रिश्तेदार पूर्व डकैत, बिग बॉस फेम पूर्व दस्यु सुंदरी भी शामिल हुई. इटावा में आयोजित इस तीन दिवसीय फिल्म महोत्सव में भारत सहित नौ देशों की चुनिंदा 19 फ़िल्में प्रदर्शित की गईं. बता दें कि इटावा के. आसिफ का जन्मस्थान भी है. के. आसिफ, जिनकी लगन और जुनून की बदौलत ‘मुगल-ए-आज़म’ जैसा शाहकार हिंदी सिनेमा में संभव हुआ. यह फिल्म फेस्टिवल के. आसिफ को याद करने की सार्थक कोशिश थी.
तीन दिन तक चला फिल्म फेस्टिवल
इस दौरान वाइल्ड फोटोग्राफर राजीव तोमर, प्रसिद्ध दस्तावेजी फिल्म निर्माता शाह आलम और वरिष्ठ पत्रकार ज्योति लवनियां द्वारा कैद की गई तस्वीरों की प्रदर्शनी लगी जो चंबल के विभिन्न आयामों को समझने में मददगार रही. स्थानीय तमाम स्कूलों के छात्र-छात्राओं के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मन मोहा, तो वही स्थानीय कलाकारों, फिल्मकारों को मंच देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया. तीन दिवसीय सिनेमा उत्सव कार्यक्रम में प्रसिद्ध फिल्मकार मोहन दास, सतेन्द्र त्रिवेदी, फिल्म अभिनेता रफी खान, अजय महेन्द्रू, रवि पाण्डेय, आजतक के फिल्म संपादक अनुज शुक्ला, पूर्व बागी सरगना बलवंत सिंह तोमर, पूर्व दस्यु सुंदरी व बिग बॉस फेम सीमा परिहार, बागी हरि सिंह पवार, मुन्ना सिंह मिर्धा, सूफी गजल गायक रोहित हितेश्वर, राजभाषा अधिकारी लक्ष्मन सिंह देव आदि ने शिरकत की.
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गजलकार ने गाया फिल्म फेस्टिवल गीत
उद्घाटन समारोह सत्र में के. आसिफ की मुगल-ए-आजम के सफरनामे पर वक्ताओं ने चर्चा की. इस दौरान युवा फिल्म निर्देशक धर्मेंद्र उपाध्याय की डॉक्युमेंट्री फिल्म चंबल इन बॉलीवुड का प्रदर्शन हुआ. इस डॉक्युमेंट्री फिल्म में हिंदी सिनेमा और तीन राज्यों में स्थित चंबल घाटी के फिल्म लैण्ड को दर्शाती तस्वीर उभर कर सामने आती है. फिल्म फेस्टिवल में दुनिया की 150 भाषाओं में गजल गाने वाले डॉ. गजल श्रीनिवास ने चंबल गीत गाकर सुनाया. इस ऐतिहासिक गीत को पचनद घाटी के सरोकारी वयोवृद्ध कवि विजय सिंह पाल ने लिखा है.
दुनिया भर में नजीर बने के. आसिफ: शाह आलम
फिल्म फेस्टिवल के आयोजक शाह आलम ने कहा कि मशहूर बॉलीवुड फिल्म डायरेक्टर के आसिफ ने अपनी फिल्में बड़ी ही शिद्दत और जुनून के साथ किया. वे दुनिया भर में नजीर बन गए. के आसिफ पर शोध कर दस्तावेजी फिल्म बनाने और उनके नाम पर चंबल घाटी में फिल्म स्कूल खोलकर चंबल घाटी के युवाओं को तराशने का मुद्दा उठाया गया. जिससे फिल्मलैण्ड की वास्तविक छवि दुनियां के सामने नुमाया हो सके. पुरातात्विक सभ्यता की खान चंबल के अनगिनत किस्से सामने आ सकें. के. आसिफ चंबल इंटरनेशल फिल्म फेस्टिवल में दिनेश शाक्य, इं. राज त्रिपाठी, रंजीत सिंह, डा. कमल कुशवाहा, कुमार मनोज, इं. योगेश यादव, गौतम शाक्य, रौली यादव, अजय कुमार, रविन्द्र चौहान की मजबूत टीम की बदौलत संपन्न हुआ.
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ये फिल्में हुईं प्रदर्शित
फिल्म फेस्टिवल के दौरान के. आसिफ की मुगल-ए-आजम, पान सिंह तोमर, चम्बल इन बॉलीवुड, संध्या, कैफ़े ईरानी चाय, मीडियम रेयर (इटली), वरम (अमेरिकी), यक्षी (दुबई), लिटिल आईज़ (ऑस्ट्रेलिया), मृगतृष्णा (नेपाल), द सीक्रेट लाइफ ऑफ बैलून्स (लंदन), विथ माय ओन टू हैंड्स (पैरिस), काउंटर (शिकागो), मेहरम (मुंबई) और रेपरक्युशन (ईरान) फ़िल्में दिखाई गईं.
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