बरेली: हलाला, तीन तलाक और बहुविवाह के खिलाफ आवाज उठाने वाली आला हजरत खानदान की पूर्व बहू निदा खान के खिलाफ फतवा जारी करने के मामले में उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग की टीम ने दोनों पक्षों के लिखित बयान दर्ज किए हैं. Also Read - VIDEO: गणतंत्र दिवस पर बॉलीवुड किंग शाहरुख़ खान बोले- 'मैं मुस्लिम हूं, पत्नी हिंदू और मेरे बच्चे हैं हिंदुस्तान'

आला हजरत खानदान की बहू निदा खान को इस्लाम से खारिज करने के फतवे पर गुरुवार को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग की दो सदस्यीय जांच समिति ने पहुंचकर निदा और उनके खिलाफ फतवा जारी करने वाले पक्ष से बातचीत की. अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य रूमाना सिद्दीकी और कुंवर इकबाल हैदर ने दोनों पक्षों के लिखित बयान दर्ज किए. आज जांच रिपोर्ट आयोग की बैठक में रखी जाएगी. जांच समिति ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह घटना बेहद संवेदनशील है. इससे धार्मिक, जनभावनाएं जुड़़ी हैं. इसके बावजूद कोई भी व्यक्ति कानून को चुनौती नहीं दे सकता है. कानून का राज है. फतवे के जरिये कानून का उल्लंघन करने वालों पर मुकदमा दर्ज हो सकता है. Also Read - भाजपा का दावा, पाकिस्तान में हर साल हजार-हजार लड़कियों का होता है धर्म परिवर्तन

तीन तलाक, हलाला के खिलाफ लड़ने वाली निदा खान पर दरगाह आला हजरत सख्‍त, इस्‍लाम से किया खारिज Also Read - सरना क्या है? झारखंड में क्यों उठ रही नए धर्म की मांग

निदा को मिला एक और गनर
जिलाधिकारी वीरेन्द्र कुमार सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुनिराज जी. समिति से मिलने पहुंचे और समिति ने अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम का फीडबैक लिया. इस बीच, गत 16 जुलाई को बरेली शहर के बानखाना क्षेत्र में एक कथित हलाला पीड़िता के बचाव के लिये पहुंची निदा पर भीड़ के ‘हमले’ के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गयी है. उनके पास पहले से ही एक गनर था अब एक और गनर उन्हें दे दिया गया है.

आला हजरत दरगाह के दारुल इफ्ता विभाग ने जारी किया था निदा के खिलाफ फतवा
मालूम हो कि गत 16 जुलाई को आला हजरत दरगाह के दारुल इफ्ता विभाग ने निदा के खिलाफ फतवा जारी किया था. शहर इमाम मुफ्ती खुर्शीद आलम ने प्रेस कांफ्रेंस में दावा किया था कि मुफ्ती अफजाल रजवी के दस्तखत से जारी फतवे में कहा गया है कि निदा अल्लाह और उसके बनाये हुए कानून की मुखालिफत कर रही हैं, लिहाजा उनका ‘हुक्का-पानी’ बन्द कर दिया गया है. निदा की मदद करने वाले और उनसे मिलने-जुलने वाले मुसलमानों को भी इस्लाम से खारिज किया जाएगा.

तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं के खिलाफ निदा ने छेड़ा है अभियान
मुफ्ती आलम ने बताया कि फतवे के मुताबिक निदा अगर बीमार हो जाती हैं तो उनको दवा भी नहीं दी जाएगी. निदा की मौत पर जनाजे की नमाज पढ़ने पर भी रोक लगा दी गई है. इतना ही नहीं निदा की मृत्यु होने पर उन्हें कब्रिस्तान में दफनाने पर भी रोक लगा दी गयी है. निदा की शादी आला हजरत खानदान के उस्मान रजा खां उर्फ अंजुम मियां के बेटे शीरान रजा खां से 16 जुलाई 2015 को शादी हुई थी मगर बाद में पांच फरवरी 2016 को उनका तलाक हो गया था. उसके बाद निदा ने अदालत का सहारा लिया है. निदा अन्य तलाकशुदा महिलाओं के लिये भी आंदोलन कर रही हैं. उन्होंने तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं के खिलाफ भी अभियान छेड़ रखा है. (इनपुट एजेंसी)