नई दिल्ली: 2019 का लोकसभा चुनाव सिर पर है. राजनीतिक पार्टियां तो तैयारी कर ही रही हैं, लेकिन जेल में बंद माफिया और डॉन भी इस चुनाव में उतरने के लिए कमर कस रहे हैं. वे टिकट के लिए जुगाड़ में लग गए हैं. राजनीतिक पार्टियों ने कभी भी गैंगेस्टर्स को चुनाव मैदान में उतारने से परहेज नहीं किया. हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक हाल ही में राजनीतिक पार्टी बनाने वाले अक्षय प्रताप सिंह ने बरेली जिला जेल में अतिक अहमद से मुलाकात की थी. प्रयागराज क्षेत्र में अतीक अहमद का काफी प्रभाव है, जिसका फायदा जनसत्ता पार्टी उठाना चाहती है. हालांकि अक्षय ने इस मुलाकात को दो पुराने दोस्तों का मिलन बताया, लेकिन घटनाक्रम से परिचित लोगों का कहना है कि अक्षय ने अतीक अहमद से लोकसभा चुनाव लड़ने की पेशकश की है. कुंडा (प्रतापगढ़) के निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया द्वारा शुरू की गई जनसत्ता पार्टी लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों को उतारने की योजना बना रही है.

मुख्तार अंसारी भी लड़ सकते हैं चुनाव
2004 में अतीक ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर फूलपुर से लोकसभा चुनाव जीता था. हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी के रूप में उन्होंने श्रावस्ती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन बीजेपी से हार गए. गैंगेस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी जो इस समय बांदा जेल में हैं बीएसपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले, अंसारी ने अपनी पार्टी कौमी एकता दल (QED) को बीएसपी में मिला लिया था और मऊ विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी. अंसारी के खिलाफ 45 आपराधिक मामले हैं और वह हत्या के दो मामलों में आरोपी हैं.

धनंजय सिंह भी टिकट की रेस में
पार्टी अध्यक्ष मायावती उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग कर रही हैं. अंसारी के टिकट को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है, लेकिन उनके भाई अफजल अंसारी को गाजीपुर लोकसभा सीट के लिए हरी झंडी दे दी गई है. बीएसपी के एक पूर्व सांसद धनंजय सिंह, जिन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 2014 का चुनाव हार गए थे. कथित तौर पर बसपा नेताओं से टिकट के लिए बातचीत कर रहे हैं. सिंह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं.

ये भी लाइन में
सूत्रों ने कहा कि धनंजय और मायावती के बीच शुरुआती बातचीत में कोई फैसला नहीं हो पाया था. वह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनसत्ता पार्टी के भी संपर्क में हैं. रिजवान जहीर भी कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में श्रावस्ती से चुनाव लड़ सकते हैं. उन्हें पीस पार्टी के टिकट पर 2014 के लोकसभा चुनावों में असफलता मिली थी. गोरखपुर के बहुचर्चित माफिया डॉन और पूर्व विधायक हरि शंकर तिवारी संत कबीर नगर के अपने बेटे भीम शंकर उर्फ कुशाल तिवारी के लिए बसपा का टिकट पाने की कोशिश कर रहे हैं.

पवन पांडे भी चाहते हैं टिकट
फैजाबाद-अंबेडकर नगर क्षेत्र में अपने प्रभाव के लिए जाने जाने वाले पवन पांडे (पूर्व बसपा सांसद) भी सुल्तानपुर सीट के लिए पार्टी से टिकट की दौड़ में हैं. बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आरोपी हैं जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले शिवसेना से बसपा का रुख किया था. डकैत ददुआ के भाई हिस्ट्रीशीटर और एक्सटॉर्शनिस्ट बाल कुमार पटेल बांदा से सपा का टिकट चाहते हैं. माफिया डॉन उमाकांत यादव, जिनका जौनपुर-आजमगढ़ क्षेत्र में प्रभाव है और पिछले साल राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) से बसपा में आ गए थे, पूर्वी यूपी की एक सीट से चुनाव लड़ सकते हैं.

कैसे स्वच्छ होगी राजनीति
नरेंद्र भाटी, कादिर राणा, हाजी मोहम्मद याकूब, डीपी यादव, कपिल मुनि करवरिया, जितेंद्र सिंह बबलू, बृजभूषण शरण सिंह, विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह और भगवान शर्मा जैसे अन्य लोग भी टिकट की दौड़ में हैं. राजनीतिक पर्यवेक्षक एके मिश्रा का कहना है कि चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दल यूपी में गैंगस्टरों और अपराधियों को टिकट दे रहे हैं. चुनाव आयोग ने चुनाव सुधार का आह्वान किया है, लेकिन अपराधियों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है.