लखनऊ: पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव के बाद अब राजनीतिक पार्टियां लोकसभा चुनाव 2019 की रणनीति बनाने में जुट गई हैं. ऐसे में यूपी में बीते लोकसभा उपचुनाव में जीत से उत्‍साहित विपक्षी पार्टियां बीजेपी के समीकरण को बिगाड़ने के लिए एकजुट होकर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक, यूपी में सपा-बसपा और आरएलडी के बीच गठबंधन का फॉर्मूला तैयार हो गया है. इसमें कांग्रेस को शामिल नहीं करने की बात सामने आ रही है.Also Read - सुना है कि बीजेपी अपने 150 MLA के टिकट काटने जा रही... हमने 300 सीटों को पार कर लिया: अखिलेश यादव

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जी न्‍यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में सपा-बसपा के बीच 37-38 का फार्मूला तय हुआ है. इसमें गठबंधन की सहयोगी आरएलडी को भी तीन सीटें देने की बात तय हुई है. जो कि पश्चिमी यूपी की होंगी. सूत्रों के मुताबिक, सीट बंटवारे के तय फ़ॉर्मूले का औपचारिक ऐलान बसपा सुप्रीमो मायावती के जन्‍मदिन यानी 15 जनवरी को किए जाने की संभावना है. कांग्रेस की तीन राज्‍यों में जीत के बाद भी मिशन 2019 के लिए समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने महागठबंधन में शामिल न करने का फैसला कर लिया है. सूत्रों के मुताबिक, यूपी में ये सपा-बसपा और आरएलडी मिलकर गठबंधन बनाएंगे. बता दें कि बीते साल यूपी में हुए लोकसभा उपचुनाव में इसी गठबंधन ने बीजेपी को करारी शिकस्‍त दी थी. Also Read - Maharashtra: नांदेड़ से तीन बार सांसद रह चुके भास्‍करराव खतगांवकर ने BJP छोड़ी, कांग्रेस में वापस लौटे

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यूपी से तय होती है दिल्‍ली की कुर्सी

बता दें कि दिल्‍ली की कुर्सी का सफर बिना यूपी फतेह के संभव नहीं है. ऐसे में देश में सर्वाधिक 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी एक साथ चुनाव लड़कर ज्‍यादा से ज्‍यादा सीटें जीतना चाहेंगी. वहीं, महागठबंधन की सहयोगी पार्टी आरएलडी को वो उन 3 से 4 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए चुनावी मैदान में उतारेगी, जहां न तो बसपा की स्थिति अच्छी है और न समाजवादी पार्टी की, ऐसे में बीजेपी को रोकने के लिए वो ऐसी जगह पर आरएलडी को साथ लेकर चलेगी. सूत्रों के मुताबिक, सपी-बसपा अपने-अपने हिस्से से आरएलडी को ये सीटें देगी.

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बीजेपी ने 2014 में जीतीं थीं 73 सीटें

बता दें कि 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपना दल के साथ मिलकर जहां 73 सीटें जीती थीं. वहीं, सपा पांच और कांग्रेस को दो सीटों पर ही सफलता मिली थी, जबकि बसपा अपनी खाता भी नहीं खोल सकी थी. वहीं, उपचुनाव 2018 में सपा दो और रालोद एक सीट, बीजेपी से झटकने में कामयाब रही थी.

अखिलेश यादव ने राहुल के पीएम पद की उम्मीदवारी से किया इनकार

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को गठबंधन का पीएम चेहरा मानने से सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इनकार कर दिया है. अखिलेश यादव ने मंगलवार को कहा कि महागठबंधन को लेकर सिर्फ बात चल रही है. शरद पवार, ममता बनर्जी और चंद्रबाबू नायडू जैसे तमाम लोग इसकी कोशिश कर चुके हैं. जरूरी नहीं की सब दल के लोग एक नाम पर सहमत हो जाएं. ऐसे में राहुल गांधी को पीएम उम्‍मीदवार बताने का प्रस्ताव कोई मायने नहीं रखता.