लखनऊ: लोकसभा चुनाव की आहट के बीच उत्तर प्रदेश के बंटवारे का मुद्दा एक बार फिर उठा है. इस दफा यह मामला दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) ने उठाते हुए इसके समर्थन में बाकायदा आंदोलन छेड़ने का एलान किया है. आम आदमी पार्टी बुंदेलखंड, पूर्वांचल सहित यूपी के चार हिस्से करने की मांग करेगी. आप के प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश एक विशाल राज्य है और आबादी के लिहाज से देखें तो इसे दुनिया का पांचवा सबसे बड़ा राज्य माना जा सकता है. इतने बड़े सूबे का असल मायने में विकास कर पाना अब व्यावहारिक दृष्टि से दूभर है. Also Read - अचानक बिजली के लोड कम होने से पावर ग्रिड के फेल होने का खतरा, जानें क्या है सरकार की रणनीति

पार्टियों को गंभीरता से सोचना चाहिए: संजय सिंह
राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी छोटे राज्यों की पक्षधर है. वह उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की हिमायत करती है और वह इस मांग को लेकर आंदोलन भी करेगी. पार्टी इस आंदोलन की रणनीति दो-चार दिन में तय कर लेगी. इस सवाल पर कि उत्तर प्रदेश के विभाजन का दूसरी पार्टियां कड़ा विरोध जता चुकी हैं, सिंह ने कहा कि भाजपा भी छोटे राज्यों के गठन की हिमायती है. बुंदेलखण्ड के लोग, पूर्वांचल के निवासी और पश्चिमी क्षेत्र के बाशिंदे भी अपने लिए अलग राज्य की मांग अर्से से कर रहे हैं. यह जनभावना का सवाल है. पार्टियों को इस पर गम्भीरता से सोचना चाहिए. Also Read - बरेली दरगाह से निकाले गए कम से कम 200 लोग, सभी को पृथक वास में रहने का आदेश

बुंदेलखंड को अलग राज्‍य बनाने की मांग पकड़ रही जोर, मध्‍यप्रदेश के चुनावी घोषणा पत्र में शामिल हो मुद्दा’ Also Read - यूपी में तबलीगी जमात के 47 लोग कोरोना पॉजिटिव, संक्रमितों की संख्या 174 हुई  

छोटे राज्य विकास के लिए जरूरी
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का रुख यह है कि कानून-व्यवस्था और विकास की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए छोटे राज्यों का गठन जरूरी है. अभी उत्तर प्रदेश की हालत देखिए. मैं पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जमीनी स्तर पर चीजों को देख रहा हूं. जर्जर कानून-व्यवस्था होने और विकास की अनदेखी के कारण स्कूल, सड़क और अस्पताल नहीं बन पा रहे हैं. सोनभद्र सबसे ज्यादा राजस्व देता है, मगर वहां के हालात देखिए. पूर्वांचल की हालत देख लीजिए. उत्तर प्रदेश चार राज्यों में बंट जाएगा तो अच्छा रहेगा. वैसे, पहले भी उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन की मांगें होती रही हैं, मगर ज्यादातर दलों के लिए यह सियासी सहूलियत का मामला कभी नहीं रहा.

‘आप’ का साथ आना आंदोलन को देगा धार: भानुसहाय
बता दें कि बुंदलेखंड जैसी इलाके को लंबे समय अलग राज्य बनाने की मांग की जाती रही है. केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने 2014 में इसका वायदा भी किया था, लेकिन इसके बाद उन्होंने ऐसा कराने से मना कर दिया. अलग राज्य के लिए लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानुसहाय ने कहा कि आम आदमी पार्टी का साथ आना अलग राज्य की लड़ाई को आगे बढ़ाएगा. यह कहीं न कहीं उनके आंदोलन पर कामयाबी की मुहर है. वह आगे भी तेजी से अलग राज्य के लिए और मुखर होंगे.

बड़े राज्य के तमगे से क्या होगा: संतोष

वहीँ, अलग बुंदलेखंड की लड़ाई में कूदे हमीरपुर जिले के युवा संतोष कुमार राजेंद्र क्रमिक अनशन कर रहे हैं. अनशन के दौरान उन्होंने कहा कि बुंदलेखंड कभी कहीं ज्यादा अमीर था, लेकिन राजनीति ने उसे गरीब बना दिया है. यदि राजनैतिक दल चाहें तो देश का कोई भी हिस्सा बदहाल नहीं रह सकता, लेकिन राजनैतिक दल ऐसा नहीं चाहते हैं. बुंदेलखंड क्या… जहां भी अलग राज्य की संभावनाएं हैं, उसे अलग किया जाना चाहिए. सबसे बड़े राज्य का तमगा लेकर भी क्या करेंगे, जब बदहाली कम होने का नाम नहीं लेती. अलग राज्य में हम अपनी आवाज़ मुखर तो कर सकते हैं.