लखनऊ: डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या पर बीजेपी विधायक अलका राय ने खुशी जताई है. अलका राय बीजेपी विधायक रहे दिवंगत कृष्णानंद राय की पत्नी हैं. कृष्णानंद राय की मुन्ना बजरंगी ने 2005 में गोली मारकर हत्या कर दी थी. बीजेपी विधायक अलका राय ने मुन्ना बजरंगी के मारे जाने के बाद कहा कि उन्हें जब खबर मिली तो उन्हें खुशी हुई. उन्होंने कहा कि भगवान ने उन्हें न्याय दिया है. बीजेपी विधायक ने कहा कि उनके परिवार को हमेशा डर बना रहता था. मुन्ना बजरंगी के कारण असुरक्षित महसूस करते थे. मुन्ना के कारण कई महिलाएं विधवा हुई हैं. Also Read - Kanpur Encounter: परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी और 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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मालूम हो कि मुन्ना बजरंगी भाजपा के विधायक रहे कृष्णानंद राय की हत्या में मुख्य आरोपी था. आज सुबह पेशी पर लाए गए मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या कर दी गई. उसे दस गोलियां मारी गईं. मौके पर उसकी मौत हो गई. मुन्ना बजरंगी 2009 से जेल में था. उसे झांसी जेल से बागपत में पेशी पर ले जाया गया था. Also Read - बदमाशों ने पहले सड़क पर रखी JCB, फिर पुलिस वालों पर AK-47 से चला दीं ताबड़तोड़ गोलियां, जानिए घटना से जुड़ी बड़ी बातें

पूर्वांचल के कुख्‍यात डॉन मुन्‍ना बजरंगी की बागपत जेल में गोली मारकर हत्‍या

विधायक पर AK-47 से बरसाई थी गोलियां, छलनी कर दिया था शरीर

मुन्ना 29 नवंबर 2005 को जिस दुस्साहस के सामने आया, उसने सभी को हिलाकर रख दिया. मुन्ना ने गाजीपुर के मोहम्मदाबाद से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की गोलियों से छलनी कर हत्या कर दी. विधायक गांव बसवानिया एक शादी में पहुंचे थे. वह खतरे के बाद भी अपनी बुलेटप्रूफ कार छोड़ साधारण गाड़ी से शादी में पहुंचे. इसी बीच विधायक बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के एक क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करने चले गए. मुन्ना और उसके गैंग के साथ विधायक पर हमला बोल दिया. मुन्ना ने एके-47 से फायरिंग की. मुन्ना और उसकी गैंग ने विधायक सहित सात लोगों को मार दिया. मुन्ना ने विधायक को इतनी गोलियां मारी थी कि उनके शरीर से 100 से अधिक गोलियां निकली थीं. मुन्ना और उसकी गैंग ने विधायक की दो गाड़ियों पर इतनी गोलियां बरसाई थीं कि हर मृतक से शरीर से 50 से 100 गोलियां निकली थीं.

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कालीन मजदूर प्रेम प्रकाश ऐसे बन गया डॉन मुन्ना बजरंगी

मुन्ना बजरंगी जौनपुर जिले के सुरेरी थाना इलाके के पूरेदयाल गांव का रहने वाला था. उसके पिता का नाम पारसनाथ है. पारसनाथ गरीब मजदूर थे. इसीलिए मुन्ना का बचपन बेहद गरीबी में बीता. पारसनाथ को उम्मीद थी कि 1967 में जन्मा प्रेम प्रकाश पढ़-लिखकर अच्छा काम करेगा, लेकिन 15 की उम्र तक आते-आते प्रेम प्रकाश ने मुन्ना बजरंगी बनने की ओर कदम बढ़ा दिए. प्रेम प्रकाश ने 5वीं के बाद स्कूल छोड़ दिया. वह भदोही में कालीन व्यापारियों के यहां मजदूरी करने लगा. यही वो दौर था जब प्रेम प्रकाश ने अपराध की बढ़ना शुरू कर दिया. मुन्ना बजरंगी पर जौनपुर जिले के सुरेरी थाना में पहली बार 1 जनवरी, 1982 को 15 साल की उम्र में मामला दर्ज हुआ था. यह मारपीट का छोटा मुकदमा था, लेकिन इसके बाद मजदूरी करते हुए ही मुन्ना ने अपना गैंग बना लिया.

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1984 में पहली बार की हत्या, पूर्वांचल में दहशत बना मुन्ना

गैंग बनाने के बाद मुन्ना लगातार अपराध करने लगा. 1984 में पहली बार उसने जौनपुर के रामपुर में एक व्यक्ति का मर्डर किया और गायब हो गया. इसके बाद उसने 1993 में ब्लॉक प्रमुख रामचंद्र सिंह की हत्या कर दी. मुन्ना ने उनके असलहे भी लूट लिए. दो साल बाद 1995 में मुन्ना ने वाराणसी के कैंट इलाके में दो लोगों का मर्डर कर दिया. इसी साल 24 जनवरी को जौनपुर के जमलापुर गांव में ब्लॉक प्रमुख कैलाश दुबे को मार दिया. वाराणसी के ही लंका इलाके के काशी विद्यापीठ छात्रसंघ के अध्यक्ष रामप्रकाश पांडे और पूर्व अध्यक्ष सुनील राय समेत चार लोगों की हत्या के बाद मुन्ना दहशत का दूसरा नाम बन गया. इन घटनाओं के बाद मुन्ना बजरंगी का अपराध की दुनिया में पाँव जम गया. लोग उसके नाम भर से ही डरने लगे. आपराधिक हौसलों के चलते वह बाहुबली मुख्तार अंसारी तक पहुंच गया.

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अंडरवर्ल्ड में भी गूंजा नाम, अबु सलेम को मारने का मिला था काम

मुन्ना यूपी तक ही सीमित नहीं रहा. वह मुंबई गया. और यहीं उसके रिश्ते अंडरवर्ल्ड से भी हो गए. बताया जाता है कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम के संपर्क में आया. दाऊद अबु सलेम को मारना चाहता था और यह काम उसने मुन्ना बजरंगी को सौंपा था, लेकिन इससे पहले ही मुंबई में 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को पकड़ लिया. इसके बाद मुन्ना जेल में था. वह अलग-अलग जेलों में था. झांसी की जिला कारागार में लंबे समय से था. बागपत में पेशी के लिए उसे झांसी से ही ले लाया गया था. वह झांसी जेल में बीमार भी रहता था. उसे हाईब्लड प्रेशर की शिकायत थी. अक्सर उसे अस्पताल में भर्ती कराया जाता था.