लखनऊ: पिछले 5 दिन से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे आईपीएस सुरेंद्र कुमार दास की आखिरकार मौत हो गई. आज कानपुर के अस्पताल में उनका निधन हो गया. आईपीएस अधिकारी की मौत की वजह और उनकी जिंदगी को लेकर जो खुलासे हुए हैं, वह बेहद चौंकाने वाले हैं. आईपीएस सुरेंद्र कुमार ने जिंदगी को खत्म करने का फैसला अचानक नहीं लिया, बल्कि वह कई दिन से खुद को खत्म करने की योजना बना रहे थे. इसके लिए उन्होंने गूगल पर कई दिन तक ‘आसानी से सुसाइड करने के तरीके’ सर्च कर रहे थे. इनमें से सल्फास खाना उन्होंने सबसे आसान लगा. सुसाइड से पहले उन्होंने एक नोट लिखा, जिसमें घरेलू झगड़ों से तंग आने की बात लिखी. सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी डॉक्टर पत्नी के लिए ‘आई लव यू’ भी लिखा.

घरेलू झगड़ों के कारण डिप्रेशन में थे
2014 बैच के आईपीएस अधिकारी सुरेंद्र कुमार कानपुर में एसपी (पूर्वी) पद पर तैनात थे. बलिया के रहने वाले सुरेंद्र कुमार की उम्र सिर्फ 30 वर्ष थी. सुसाइड से पहले उन्होंने सात लाइन का एक नोट लिखा. कई दिनों से डिप्रेशन में रहे आईपीएस ने सुसाइड नोट में लिखा- ‘मेरे जहर खाने के पीछे किसी का दोष नहीं है. मैं रोज-रोज की छोटी छोटी बातों पर घरेलु झगड़ों से परेशान होकर यह कदम उठा रहा हूं.’ उन्होंने कई बातों के साथ ही अपनी पत्नी डॉ. रवीना सिंह के लिए ‘आई लव यू’ भी लिखा.

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लगातार होता था झगड़ा
पुलिस इस बात की पुष्टि कर चुकी है कि आईपीएस को घरेलू तनाव था. बताया जा रहा है कि पत्नी के साथ वह खुश नहीं थे. पत्नी के नॉनवेज खाने को लेकर भी मतभेद थे. 2 सितंबर को जन्माष्टमी के दिन पत्नी द्वारा नॉनवेज खाने पर उनका झगड़ा हुआ था. ऐसी ही कई बातों पर अक्सर उनके बीच झगड़े होते थे. सुसाइड नोट में उन्होंने इस कदम को खुद का फैसला बताया. और लिखा कि इसमें किसी का भी दोष नहीं है. वह ये कदम अपनी मर्जी से उठा रहे हैं.

इंटरनेट पर सर्च किए सुसाइड के तरीके, वीडियो भी देखे
आईपीएस सुरेंद्र कुमार इतना ऊब गए कि वह सुसाइड करने का सोचने लगे थे. इसके लिए वह काफी दिन से सुसाइड के तरीके सर्च कर रहे थे. इसका खुलासा भी उन्होंने सुसाइड नोट में किया. उन्होंने लिखा कि वह गूगल पर सुसाइड के तरीके सर्च कर रहे थे. उन्होंने सर्च किया कि क्या हाथ की नस काट कर सुसाइड किया जा सकता था. या जहर खाकर. वह ऐसा तरीका चाहते थे, जिसमें तुरंत ही किसी को पता न चले. इसके उन्होंने वीडियो भी देखे और जहर खाने का फैसला किया. उन्होंने ‘चूहे बहुत हो गए हैं’ की बात कहकर अपने मातहतों से सल्फास पहले ही मंगा ली थी. और 5 सितंबर को उन्होंने सल्फास की तीन गोलियां खा लीं.

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पांच दिन की जद्दोजहद के बाद भी नहीं बची जान
पांच दिन तक जिंदगी और मौत से जूझते रहे सुरेंद्र कुमार के इलाज के लिए मुंबई से डॉक्टर्स की टीम बुलाई गई थी. कानपुर रीजेंसी में इलाज के लिए कुछ उपकरण नहीं थे, जिन्हें कानपुर से मंगाया गया. कई आईपीएस अधिकारी उन्हें बचाने की कोशिश में जुटे हुए थे, लेकिन उन्होंने सल्फास इतनी ज्यादा मात्रा में खाया था कि बचाना बेहद मुश्किल हो गया. उन्होंने 25 ग्राम सल्फास खाया था.