लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में माटी कला एवं माटी शिल्प कला से संबंधित उद्योगों के विकास के लिए माटी कला बोर्ड का गठन कर दिया है. इसके जरिए प्लास्टिक कप के स्थान पर मिट्टी के कुल्हड़ों को प्रोत्साहित किया जाएगा. माटी कला बोर्ड के संचालक मंडल भी तय कर दिए गए हैं. इस बोर्ड के अध्यक्ष खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के मंत्री अथवा शासन द्वारा नामित प्रतिनिधि होंगे. इस संबंध में शासन की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई.

इस सम्बन्ध में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत सहगल ने बताया कि संचालक मंडल में खादी ग्रामोद्योग, वित्त, राजस्व, खनिज, समाज कल्याण, श्रम, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव तथा उत्तर प्रदेश राज्य कार्यालय खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के निदेशक को सदस्य नामित किया गया है. इनके अलावा अशासकीय सदस्य के रूप में माटी कला, माटी शिल्प कला, फाइन आर्ट्स, समाज सेवा से जुड़े हुए व्यक्तियों एवं विशेषज्ञों के अधिकतम 10 सदस्यों को शासन द्वारा नामित किया जाएगा. कुटीर एवं ग्रामीण उद्योग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को बोर्ड के पदेन महाप्रबंधक को सदस्य सचिव बनाया गया है.

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सहगल ने बताया कि प्रदेश में मिट्टी का कार्य करने वाले कारीगरों एवं शिल्पियों के व्यवसाय में वृद्धि करने, कलाकारों की परम्परागत कला को संरक्षित एवं संवर्धित करना इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य है. इसके साथ ही इन कारीगरों एवं शिल्पियों की सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सुदृढ़ता एवं तकनीकी विकास को बढ़ावा देने, विपणन आदि की सुविधा उपलब्ध कराने तथा परम्परागत उद्योगों को नवाचार के माध्यम से अधिकाधिक लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे.

उन्होंने बताया कि यह बोर्ड माटी कला एवं माटी शिल्प कला से संबंधित उद्योगों के विकास के लिए नीति तैयार करेगा. मिट्टी की उपलब्धता की नीति, तकनीकी उन्नयन एवं आधुनिकीकरण की प्रभावी योजना बनाएगा. मिट्टी का कार्य करने वाले लोगों को आवश्यक सुविधाएं एवं सेवाएं सुलभ कराने, कारीगरों तथा इस उद्योग की समस्याओं के निराकरण के लिए सुझाव देना और रोजगार प्रदान करने हेतु कार्य करने वाली केन्द्रीय एवं प्रांतीय संस्थाओं से समन्वय स्थापित करना बोर्ड का प्रमुख उद्देश्य होगा. सहगल ने बताया कि पर्यावरण की दृष्टि से प्लास्टिक कप के स्थान पर सरकारी कार्यालयों व सार्वजनिक स्थानों पर मिट्टी के कुल्हड़ों को प्रोत्साहित करते हुए मिट्टी से बने अन्य उत्पादों को भी वरीयता के आधार पर उनकी क्रय वरीयता जेम पोर्टल के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी.

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प्रमुख सचिव ने बताया कि माटी शिल्प कला के नवीन पीढ़ी को जोड़ने के साथ ही स्वरोजगार के अवसरों में वृद्धि करना और कच्चे माल की प्राप्ति के लिए नियमों में सरलीकरण किया जाएगा. उन्होंने बताया कि बिजली, पानी, पहुंच मार्ग आदि की व्यवस्था एवं औद्योगिक क्षेत्रों में शेड का आवंटन, इम्पोरियम खोले जाने, प्रशिक्षण प्रदान करना तथा तकनीकी कार्यशालाएं आयोजित कराना बोर्ड के क्षेत्राधिकार में रखा गया है. उन्होंने बताया कि कुम्हारी कला में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी को निकालने के लिए ग्राम पंचायतों में कारीगरों को नि:शुल्क पट्टों का आवंटन किया जायेगा. प्रमुख सचिव ने बताया कि माटी कला बोर्ड की योजनाओं का क्रियान्वयन उप्र खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी तथा जिला स्तर पर जिला ग्रामोद्योग अधिकारी के माध्यम से किया जाएगा.