लखनऊ: कार नहीं रोके जाने पर यूपी पुलिस की गोली का शिकार हुए आईफोन कंपनी एपल इंडिया के मैनेजर विवेक तिवारी का अंतिम संस्कार कर दिया गया. लखनऊ के बैकुंठ धाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया. विवेक के बड़े भाई ने मुखाग्नि दी. इस दौरान परिवार का करुण क्रंदन देख हर दिल पसीज गया. हर किसी की आंख में आंसू और पुलिस के प्रति गुस्सा था. पत्नी कल्पना व विवेक की दोनों बेटियों का भी बुरा हाल था. आसपास पुलिस वालों को देख बेटी शानवी के मुंह से निकला कि पुलिस वालों को यहां से हटाओ, इन्होंने मेरे पापा को मारा है. ऐसा सुन आसपास खड़े लोगों ने बच्ची को लिपटा लिया. Also Read - यूपी के ग्रामीणों ने गावों में प्रवेश पर लगाया प्रतिबंध, उल्लंघन करने पर लगेगा जुर्माना, पूरा गांव क्वारंटीन

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ये हुई थी घटना
शुक्रवार-शनिवार की रात विवेक तिवारी मोबाइल लॉन्चिंग के बाद घर लौट रहे थे. इसी दौरान गोमती नगर विस्तार में दो पुलिस कर्मियों ने कार रोकने का इशारा किया. रात अधिक होने और सहयोगी सना खान साथ होने के कारण विवेक ने कार नहीं रोकी तो प्रशांत चौधरी एक अन्य पुलिस कर्मियों ने बाइक आगे लगाकर उन्हें रुकने पर मजबूर किया और फिर गोली मार दी. इससे विवेक की मौत हो गई थी. इसके बाद पुलिस वाले मौके से भाग गए थे. Also Read - यूपी के 68 पुलिसवालों ने मुंड़वाए सिर, COVID-19 को हराने का लिया संकल्प

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अंतिम संस्कार को राजी नहीं थे परिजन
घटना के बाद आक्रोशित परिजन शनिवार की शाम तक विवेक तिवारी के अंतिम संस्कार को राजी नहीं थे. पत्नी कल्पना तिवारी का कहना था कि पहले सरकार और पुलिस जवाब दे कि आखिर उनके पति को क्यों मारा. कल्पना ने ये भी कहा था कि जिस बीजेपी की सरकार बनने पर उन्होंने खुशियां मनाई थीं, उसी ने उनके साथ ऐसा किया.

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नौकरी और आर्थिक सहायता की थी मांग
परिजनों ने सरकार से 1 करोड़ रुपए आर्थिक सहायता, नौकरी और बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा उठाए जाने की मांग की थी. इस पर देर शाम प्रशासन ने सहमति जता दी. घोषणा की गई थी कि कल्पना को लोअर पीसीएस रैंक की नौकरी और 25 लाख रुपए दिए जाएंगे. कुछ और भी मांगें थीं जो मानी गईं. इसके बाद परिजन विवेक का अंतिम संस्कार करने को तैयार हो गए थे.

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अंतिम संस्कार के दौरान पहुंचे बीजेपी नेता
आज गोमती नदी के किनारे स्थित बैकुंठ धाम पर अंतिम संस्कार के दौरान योगी सरकार के मंत्री ब्रजेश पाठक व आशुतोष टंडन मौजूद रहे. शनिवार को सांत्वना देने पहुंचे बीजेपी नेताओं को विवेक के परिजनों व अन्य लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा था, यहां धक्का मुक्की भी हो गई थी. परिजनों ने बिना मांगों को माने ही अंतिम संस्कार करने का दबाव बनाने का आरोप बीजेपी नेताओं पर लगाया था.

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