लखनऊ: लखनऊ में एतिहासिक मानी जाने वाली टीले वाली मस्जिद के सामने भगवान लक्ष्मण की मूर्ती लगाए जाने के प्रस्ताव पर विवाद गहरा रहा है. एक दूसरे समुदाय पर निशाने साधे जा रहे हैं. ये खबर सियासतदारों और उन लोगों के लिए है, जो ऐसा कर रहे हैं. क्योंकि उसी लखनऊ में रफत फातिमा, नाहिद अकील, चमेली गौतम, पुष्पा सिंह, मोहम्मद नासिर, समक्ष, सैय्यद वसी, नदीम और सृजन योगी जैसे लोग सौहार्द और मेल-जोल का झंडा बुलंद करने में लगे हुए हैं. लखनऊ में ‘सबके साथ सेंवई’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सभी मजहबों के लोग शामिल हुए. एक हज़ार से अधिक लोगों ने इसमें शिरकत की. Also Read - Mumbai में UP के CM योगी से शिवसेना ने बॉलीवुड और Film City के प्‍लान को लेकर किया सवाल

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गले मिले, हंसे और संदेश दिया

गंगा-जमुनी तहजीब, अदब और नफासत के लिए पूरे देश में मशहूर लखनऊ में भी हिंदू-मुस्लिम का शोर दिखाई दे रहा है. टीले वाली मस्जिद के सामने मूर्ती लगाए जाने को लेकर सियासत के बीच लखनऊ में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो एक दूसरे का हाथ थामे चलना चाहते हैं. इसी क्रम में आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके में ‘सबके साथ सेंवई’ कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें सभी धर्मों के लोग शामिल हुए और एक दूसरे के साथ सेंवई का लुत्फ़ उठाया. एक दूसरे से बातें हंसी-मजाक किया और समाज को एक रहने का संदेश दिया.

आयोजन तीन संगठनों द्वारा कराया गया.

आयोजन तीन संगठनों द्वारा कराया गया.

 

‘हम बांटने वालों की साजिश के खिलाफ हैं’

इस कार्यक्रम का आयोजन इंसानी बिरादरी, अवाम मूवमेंट और मुस्लिम वेलफेयर सोसाइटी की ओर से किया गया. कार्यक्रम के संयोजक और इंसानी बिरादरी के खिदमतगार वीरेन्द्र कुमार गुप्ता ने कहा कि कार्यक्रम की यह श्रृंखला लोगों को बांटने की साजिश के खिलाफ सबको जोड़ने के सांस्कृतिक अभियान का हिस्सा है. होली-दीपावली की तरह ईद भी सबका त्यौहार है. सेंवई की मिठास सभी के लिए है. ईद गले मिलने के लिए है, मेलजोल का झंडा लहराने के लिए है. उन्होंने बताया कि आयोजन में तकरीबन बारह सौ लोगों ने भागीदारी की.

शामिल हुए लोगों ने कहा कि वह बांटने वाली साजिश के खिलाफ हैं.

शामिल हुए लोगों ने कहा कि वह बांटने वाली साजिश के खिलाफ हैं.

 

लखनऊ में कभी नहीं हुई तनातनी

इन्हीं तीनों संगठनों द्वारा पिछली 14 जनवरी को इसी तरह मकर संक्रांति के अवसर पर ‘सबके साथ खिचड़ी’ का आयोजन किया गया था. बता दें कि लखनऊ को पूरे देश में गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता है. यहां कभी भी धर्मों समुदायों के बीच झगड़े नहीं हुए. न ही कभी तनातनी हुई.