लखनऊ: लोकसभा चुनावों को अब जबकि कुछ ही महीने रह गए हैं. उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति सत्ताधारी भाजपा और विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा होगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कहा था कि बड़ी कंपनियां राज्य में निवेश की इच्छा प्रकट कर रही हैं. इससे संकेत मिलता है कि स्थिति सुधरी है. पुलिस अधिकारियों ने योगी के इस दावे के समर्थन में आंकड़ों का हवाला भी दिया, लेकिन मानवाधिकार संगठन और विपक्षी दल योगी की इस बात से सहमत नहीं हैं. कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था पहले के मुकाबले बिगड़ी है. Also Read - हाथरस के बाद बलरामपुर में सामूहिक दुष्कर्म, अस्पताल ले जाते समय पीड़िता की मौत

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पुलिस की बर्बरता से चिंता

गैर सरकारी संगठनों ने भी पुलिस मुठभेड़ों की बढ़ती संख्या और पुलिस बर्बरता पर चिन्ता का इजहार किया है. विपक्ष का दावा है कि भाजपा सरकार के समय अपराध बढ़े हैं और कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हुई है. भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा 17 वर्षीय युवती से रेप को विपक्ष अपने आरोप का पुख्ता प्रमाण मानता है. रेप पीड़िता के पिता की बाद में मौत हो गई थी. बताया जाता है कि उन्हें पुलिस हिरासत के दौरान बुरी तरह पीटा गया था. बाद में मामला सीबीआई के पास गया तो विधायक के भाई और चार अन्य को अरेस्ट किया गया.

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अखिलेश साध चुके हैं निशाना

बागपत जेल में माफिया मुन्ना बजरंगी की हत्या एक अन्य घटना है जो विपक्ष को बोलने का मौका देती है. विपक्ष कहता है कि लोग जेलों में भी सुरक्षित नहीं हैं. सपा मुखिया एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि राज्यपाल राम नाईक हालांकि लगातार कह रहे हैं कि कानून व्यवस्था की स्थिति में और सुधार की गुंजाइश है, लेकिन भाजपा सरकार उनकी ही नहीं सुन रही है.

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अपराध की स्थिति और बिगड़ी

कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने पुलिस को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि पुलिस गरीबों पर अत्याचार करती है और राज्य सरकार के बाउंसर के रूप में कार्य करती है. पीपुल्स यूनियन फार सिविल लिबर्टीज की महासचिव वंदना मिश्रा ने दावा किया कि अपराध की स्थिति और बिगड़ी है. दलितों और मुसलमानों पर अत्याचार बढ़े हैं. महिलाओं के प्रति अपराधों में भी बढ़ोत्तरी हुई है.