लखनऊ: राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार के शहरों के नाम बदलने के कदम पर निशाना साधते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि वर्तमान सरकार में विकास के सारे कार्य रुके पड़े हैं, केवल नाम बदलने का काम हो रहा है. उन्होंने कहा कि यही नहीं प्रदेश सरकार के सहयोगी दलों के मंत्री भी नाम बदलने को लेकर अपनी ही सरकार पर निशाने साध रहे हैं. अखिलेश ने आज ट्वीट कर कहा कि ‘बंद पड़े हैं सारे काम, बिखरा पडा़ सब सामान, तरक्की के रुके रस्ते, बदल रहे बस नाम.’ उन्होंने कुछ अधूरे पड़े विकास कार्यो की फोटो भी टि्वटर पर डाली है.Also Read - Rajasthan: T20 वर्ल्‍ड कप मैच में पाक की जीत पर खुशी मनाने वाली टीचर अरेस्‍ट

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वहीं, प्रदेश में बीजेपी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश के कबीना मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने नाम में बदलाव को लेकर कहा है कि नाम बदलने के लिए खर्च की जा रही धनराशि जन कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर खर्च की जाती तो देश के हालात में बदलाव आता. यूपी की योगी सरकार में मंत्री राजभर ने भी ट्वीट के जरिए आज योगी सरकार पर तीखा हमला किया. उन्होंने कहा है कि ‘भारत का आधार उसकी गंगा जमुना तहजीब है. जितना खर्च नाम बदलने पर हो रहा है, उतना खर्च करके शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य व गरीबों के कल्याण में तेजी लाई जाती तो भारत देश का नक्शा कुछ और ही होता.’ उन्होंने ट्वीट के अंत में लिखा है कि ‘दिवाली में अली बसे ,राम बसे रमजान, ऐसा होना चाहिए अपना हिंदुस्तान.’ इससे पहले कांग्रेस ने भी राज्य सरकार के शहरों के नाम बदलने के फैसले की आलोचना की थी.

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इससे पहले रविवार को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्‍यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सरकार द्वारा फैजाबाद और इलाहाबाद का नाम बदले जाने की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि सत्‍तारूढ़ भाजपा को अपने प्रमुख मुस्लिम नेताओं के नाम भी बदल देने चाहिए. उन्‍होंने कहा कि ग्रांड ट्रंक रोड को मुस्लिम शासक शेरशाह सूरी ने बनवाया था, तो उसे भी उखाड़ दिया जाना चाहिए. भाजपा लोगों को उस पर चलने से क्‍यों नहीं रोकती. लाल किला और ताजमहल किसने बनवाया, क्‍या इन इमारतों को भी जमींदोज किया जाएगा. गौरतलब है कि इससे पहले सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने इलाहाबाद जनपद का नाम प्रयागराज किए जाने को चुनौती देने वाली एक याचिका पर राज्य व केंद्र सरकार से जवाब मांगा है.

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अदालत ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई 19 नवम्बर को नियत की है. उक्त याचिका में याची ने जनपद के नाम परिवर्तन में राजस्व संहिता की धारा 6(2) का पालन न किए जाने का दावा किया है. याची का कहना है कि नाम परिवर्तन के लिए राज्य सरकार द्वारा आवश्यक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और बिना आपत्तियां आमंत्रित किए ही जनपद का नाम बदल दिया गया. वहीं, याचिका का राज्य सरकार की ओर से विरोध करते हुए दलील दी गई कि राजस्व संहिता की धारा 6(2) में किसी राजस्व क्षेत्र की सीमाओं के परिवर्तन पर आपत्तियां आमंत्रित करने का प्रावधान है न कि नाम परिवर्तन के मामले पर.