लखनऊ: देश के कई हिस्सों में गोरक्षा के नाम पर हिंसा के मामलों पर सख्त फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में भीड़तंत्र की इजाजत नहीं दी जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र व राज्य सरकारें इसे लेकर कानून बनाएं. कोर्ट ने कहा है कि देश के सेकुलर ढांचे और कानून व्यवस्था का कायम रखना राज्य सरकारों की है. कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति खुद में कानून नहीं और कानून को हाथ में लेने का किसी को हक नहीं है. इन मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद उत्तर प्रदेश के हापुड़ में गोरक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा मार डाले गए मोहम्मद कासिम के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा जताया है. परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कहा कि किसी को भी इस तरह से नहीं मार दिया जाना चाहिए. उन्हें कोर्ट पर भरोसा है. Also Read - सीएम केजरीवाल की 'रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ' अनूठी मुहिम शुरू, राघव चड्डा लोगों के बीच पहुंचे

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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, ‘मॉब लिंचिंग’ से निपटने के लिए नया कानून बनाए संसद Also Read - सात महीने बाद सिर्फ एक दिन के लिए खुला 'बांके बिहारी मंदिर', फिर से बंद किए गए कपाट, ये है बड़ी वजह

18 जून को हापुड़ में हुई थी घटना

यूपी के हापुड़ में 18 जून को हिंसक भीड़ का शिकार हुए मोहम्मद कासिम के भाई ने सलीम ने कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है. उन्हें न्याय दिया जाएगा. बता दें कि 18 जून को हापुड़ के पिलखुआ के बझेड़ा खुर्द गांव में गोकशी के आरोप में कासिम की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. कासिम के संग एक अन्य युवक को भी पीटा गया गया. घटना की एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें वहां पहुंचे तीन पुलिस कर्मियों के सामने ही शख्स को घसीटते हुए ले जा रहे थे. फोटो के सोशल मीडिया पर वायरल होने बाद लोगों ने पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए. फोटो वायरल होने के बाद 22 जून को पुलिस अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से माफी मांगी थी. इस घटना के अलावा उत्तर प्रदेश व देश कई हिस्सों में लगातार इस तरह के मामले सामने आए. कई लोगों की पीट-पीट कर हत्या की गई.

सुप्रीम कोर्ट ने ये सुनाया है फैसला

आज मंगलवार 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को लिन्चिंग रोकने के लिए गाइडलाइंस को 4 सप्ताह के भीतर जारी करने का आदेश जारी किया है. इसके साथ ही गोरक्षा हिंसा रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने संसद से आग्रह किया है कि वह इसके लिए अलग से कानून बनाने पर विचार करे. कोर्ट ने भीड़ के पीट-पीट कर मार डालने की घटनाओं की निंदा करते हुए इसे कड़ाई से रोकने की ज़रूरत पर बल दिया. कोर्ट ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना, भीड़ द्वारा हिंसा रोकना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. सुप्रीम कोर्ट ने गौ रक्षक दलों और भीड़ द्वारा हिंसा संबंधी मामलों को लेकर गाइड लाइन जारी की. कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति ख़ुद में कानून नहीं और कानून को हाथ में लेने का किसी को हक नहीं.

सेकुलर ढांचे को कायम रखने की जिम्मेदारी सरकारों की

कोर्ट ने कहा है कि देश के सेकुलर ढांचे और कानून व्यवस्था का कायम रखना राज्य सरकारों की है. कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति खुद में कानून नहीं और कानून को हाथ में लेने का किसी को हक नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखना, भीड़ द्वारा हिंसा रोकना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है.

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बहरी नहीं हो सकती सरकारें

कोर्ट ने गौ रक्षक दलों और भीड़ द्वारा हिंसा संबंधी मामलों को लेकर गाइड लाइन जारी की है. बता दें कि इन बढ़ती घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को सख्त आदेश दिया कि वो संविधान के मुताबिक काम करें. कोर्ट ने कहा कि राज्‍य इन बढ़ती घटनाओं के खिलाफ बहरे नहीं हो सकते.