लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार को लगातार मुठभेड़ के मामलों में झटका दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नोटिस दिया है कि मुठभेड़ों के मामले में जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने जवाब देने का आदेश एनजीओ पीयूसीएल की याचिका पर दिया है. एनजीओ ने याचिका दायर कर मुठभेड़ों पर फर्जी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि मुठभेड़ों की जांच एसआईटी से कराई जाए और पीयूसीएल को पक्षकार बनाया जाए. Also Read - भूमि पूजन से पहले सीएम योगी ने अपने घर में जलाए दीप, उत्सव में शामिल हुए मंत्री और विधायक

बता दें कि यूपी में बीजेपी सरकार बनने के बाद अपराध रोकने के लिए एनकाउंटर अभियान चलाया, जो अब तक जारी है. सरकार के दस माह के दौरान 1142 एनकाउंटर की सूची जारी की गई थी. सरकार ने इस सूची में बताया था कि मुठभेड़ के दौरान 2744 अपराधी अरेस्ट हुए और 34 अपराधियों को मुठभेड़ में मारा गया. इस रिपोर्ट के बाद सामाजिक संगठन पीयूसीएल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की कि इन मुठभेड़ों की जांच कराई जाए. इस याचिका को संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है. सरकार को कोर्ट ने तीन हफ्ते का समय दिया है. Also Read - राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम के लिए लखनऊ पहुंचे संघप्रमुख मोहन भागवत, कल जाएंगे अयोध्या

बता दें कि यूपी सरकार के इस अभियान के दौरान यूपी के कई इलाकों से पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ों की भी खबरें आईं. झांसी के मऊरानीपुर में पुलिस अधिकारी का ऑडियो वायरल हुआ था. इसमें पुलिस अधिकारी एक अपराधी से एनकाउंटर डील करते हुए सुनाई दे रहा था. इसके बाद एक और मामला सामने आया था. मऊरानीपुर मामले में डील करने वाले इंस्पेक्टर को बर्खास्त कर दिया गया था. सामाजिक संगठन लगातार मुठभेड़ों पर सवाल उठाते आए हैं. Also Read - UP की कैबिनेट की मंत्री कमला रानी वरुण का कोरोना संक्रमण से निधन, CM योगी ने दुख जताया