लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने खेतों की मिट्टी के परीक्षण के लिए जांच एजेंसी के चयन में अनियमितता बरतने के आरोप में आज कृषि विभाग के नौ आला अधिकारियों को निलंबित कर दिया. राज्य के कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने यहां संवाददाताओं को बताया कि मिट्टी की जांच के लिए एजेंसी के चयन में निविदा की शर्तें केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप न होने समेत विभिन्न शिकायतें मिलने पर की गई जांच में तमाम आरोप सही पाए गए.Also Read - UP News: मुख्यमंत्री योगी ने नवनियुक्त मंत्रियों को बांटे विभाग, जितिन प्रसाद बने प्राविधिक शिक्षा मंत्री; जानिए किसे क्या मिला

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उन्होंने बताया कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए कृषि विभाग के नौ उच्च अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. इनमें दो अधिकारी संयुक्त निदेशक स्तर के, पांच अफसर उप निदेशक स्तर के और दो अधिकारी सहायक निदेशक स्तर के हैं. शाही ने बताया कि निलम्बित अधिकारियों में लखनऊ में तैनात संयुक्त कृषि निदेशक (शोध एवं मृदा सर्वेक्षण) पंकज त्रिपाठी, बरेली के कृषि उपनिदेशक विनोद कुमार, मुरादाबाद में इसी पद पर तैनात अशोक कुमार, अलीगढ़ में तैनात संयुक्त कृषि निदेशक जोगेंद्र सिंह राठौर, सहारनपुर में कृषि उपनिदेशक राजीव कुमार, उप कृषि निदेशक (झांसी) रामप्रताप, उप कृषि निदेशक (मेरठ) सुरेश चंद चैधरी, सहायक निदेशक (मृदा परीक्षण) अलीगढ़ श्रीदेव शर्मा तथा बरेली में इसी पद पर तैनात संजीव कुमार शामिल हैं. Also Read - UP: सरकारी स्‍कूल के 5 टीचर्स ने क्‍लास में किया डॉन्‍स, Video Viral होने पर गिरी सस्‍पेंशन की गाज

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कृषि मंत्री ने बताया कि इस मामले में चार कंपनियों को गलत तरीके से निविदा प्रस्तुत करने और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर हासिल करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा वर्ष 2018-19 में बरेली में यश सॉल्यूशंस कम्पनी को भुगतान की गई धनराशि की वसूली कराने के आदेश भी दिए गए हैं. मंत्री ने बताया कि जांच में मृदा परीक्षण के लिए एजेंसी के चुनाव में निविदा की शर्तें नियम कायदों के अनुरूप ना होने, अनियमितता पाए जाने तथा फर्म विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की शर्तों में गड़बड़ी किए जाने के आरोप सही पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है.