लखनऊ: बागपत की जेल में सोमवार सुबह मारे गए माफिया मुन्‍ना बजरंगी की हत्या अपराधी सुनील राठी ने ही की थी. प्रेस कांफ्रेंस करते हुए डीआईजी लॉ एंड ऑर्डर प्रवीण कुमार ने कहा कि बागपत जेल में मुन्‍ना बजरंगी की हत्‍या सुनील राठी ने ही की है. इस घटना की जानकारी जानकारी राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी दी गई है. उन्होंने बताया कि मुन्‍ना बजरंगी के शव का पोस्‍टमार्टम कराया जा रहा है.Also Read - यूपी के फिरोजाबाद का नाम बदलकर चंद्रनगर करने का प्रस्ताव, सपा, बसपा और कांग्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति

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डीआईजी लॉ एंड ऑर्डर प्रवीण कुमार ने मजिस्‍ट्रेटी जांच के अलावा इस मामले की जांच डीआईजी जेल आगरा करेंगे. उन्‍होंने यह भी बताया कि चश्‍मदीदों की गवाही के बाद सुनील राठी के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया है. घटनास्‍थल से 10 खोखे, 17 जिंदा कारतूस और 2 मैगजीन बरामद की गई हैं. इसके अलावा घटनास्‍थल पर फॉरेंसिक टीम भी जांच-पड़ताल कर रही है. डीआईजी लॉ एंड ऑर्डर ने बताया कि हत्‍या जेल में हुई है, इसलिए मामले की जांच मजिस्‍ट्रेट से ककराई जा रही है. उन्होंने बाते कि सुरक्षा में के लिए सावधानी बरती गई थी. हत्या को लेकर जेल प्रशासन की ओर से एफआईआर कराई गई है.

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कालीन मजदूर प्रेम प्रकाश ऐसे बन गया डॉन मुन्ना बजरंगी

मुन्ना बजरंगी जौनपुर जिले के सुरेरी थाना इलाके के पूरेदयाल गांव का रहने वाला था. उसके पिता का नाम पारसनाथ है. पारसनाथ गरीब मजदूर थे. इसीलिए मुन्ना का बचपन बेहद गरीबी में बीता. पारसनाथ को उम्मीद थी कि 1967 में जन्मा प्रेम प्रकाश पढ़-लिखकर अच्छा काम करेगा, लेकिन 15 की उम्र तक आते-आते प्रेम प्रकाश ने मुन्ना बजरंगी बनने की ओर कदम बढ़ा दिए. प्रेम प्रकाश ने 5वीं के बाद स्कूल छोड़ दिया. वह भदोही में कालीन व्यापारियों के यहां मजदूरी करने लगा. यही वो दौर था जब प्रेम प्रकाश ने अपराध की बढ़ना शुरू कर दिया. मुन्ना बजरंगी पर जौनपुर जिले के सुरेरी थाना में पहली बार 1 जनवरी, 1982 को 15 साल की उम्र में मामला दर्ज हुआ था. यह मारपीट का छोटा मुकदमा था, लेकिन इसके बाद मजदूरी करते हुए ही मुन्ना ने अपना गैंग बना लिया.

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1984 में पहली बार की हत्या, पूर्वांचल में दहशत बना मुन्ना

गैंग बनाने के बाद मुन्ना लगातार अपराध करने लगा. 1984 में पहली बार उसने जौनपुर के रामपुर में एक व्यक्ति का मर्डर किया और गायब हो गया. इसके बाद उसने 1993 में ब्लॉक प्रमुख रामचंद्र सिंह की हत्या कर दी. मुन्ना ने उनके असलहे भी लूट लिए. दो साल बाद 1995 में मुन्ना ने वाराणसी के कैंट इलाके में दो लोगों का मर्डर कर दिया. इसी साल 24 जनवरी को जौनपुर के जमलापुर गांव में ब्लॉक प्रमुख कैलाश दुबे को मार दिया. वाराणसी के ही लंका इलाके के काशी विद्यापीठ छात्रसंघ के अध्यक्ष रामप्रकाश पांडे और पूर्व अध्यक्ष सुनील राय समेत चार लोगों की हत्या के बाद मुन्ना दहशत का दूसरा नाम बन गया. इन घटनाओं के बाद मुन्ना बजरंगी का अपराध की दुनिया में पाँव जम गया. लोग उसके नाम भर से ही डरने लगे. आपराधिक हौसलों के चलते वह बाहुबली मुख्तार अंसारी तक पहुंच गया.

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विधायक पर AK-47 से बरसाई थी गोलियां, छलनी कर दिया था शरीर

मुन्ना 29 नवंबर 2005 को जिस दुस्साहस के सामने आया, उसने सभी को हिलाकर रख दिया. मुन्ना ने गाजीपुर के मोहम्मदाबाद से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की गोलियों से छलनी कर हत्या कर दी. विधायक गांव बसवानिया एक शादी में पहुंचे थे. वह खतरे के बाद भी अपनी बुलेटप्रूफ कार छोड़ साधारण गाड़ी से शादी में पहुंचे. इसी बीच विधायक बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के एक क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करने चले गए. मुन्ना और उसके गैंग के साथ विधायक पर हमला बोल दिया. मुन्ना ने एके-47 से फायरिंग की. मुन्ना और उसकी गैंग ने विधायक सहित सात लोगों को मार दिया. मुन्ना ने विधायक को इतनी गोलियां मारी थी कि उनके शरीर से 100 से अधिक गोलियां निकली थीं. मुन्ना और उसकी गैंग ने विधायक की दो गाड़ियों पर इतनी गोलियां बरसाई थीं कि हर मृतक से शरीर से 50 से 100 गोलियां निकली थीं.