लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी के डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. निशीथ राय ने खुद पर लगे आठों आरोपों को निराधार बताते हुए आरोपों का बिंदुवार जवाब जांच अधिकारी को सौंप दिया है. उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने साजिश रचकर उनके खिलाफ झूठे आरोप गढ़े हैं, उन पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए. डॉ. राय ने शनिवार को एक बयान जारी कर अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि सामान्य परिषद के सामने उन्हें गलत साबित करने के लिए फर्जी और गलत सबूत पेश किए गए. Also Read - Driving License Latest Update: अब चुटकियों में बन जाएगा ड्राइविंग लाइसेंस, बदल गए हैं नियम, जानिए

उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी को सौंपे 543 पन्नों के अपने जवाब में बिंदुवार सभी आरोपों के जवाब दिए गए हैं. सभी आरोप मनमाने, छद्म और दुराग्रह से प्रेरित हैं. डॉ. राय ने कहा, “हमारी मांग है कि यह जांच जल्द से जल्द पूरी की जाए और शासन व विश्वविद्यालय के जिन अधिकारियों ने उनके खिलाफ षड्यंत्र रचा है, उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाए.’ उन्होंने अपने जवाब में कहा है कि एक शिकायतकर्ता डॉ. अभय कृष्णा की ओर से मार्च, 2017 में एक फर्जी एवं मनगढ़ंत शिकायती पत्र मुख्यमंत्री को भेजा गया और उसी के आधार पर उनके खिलाफ आरोप तय किए गए, जबकि खुद शिकायतकर्ता ने ही मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर कहा कि उन्होंने वैसा कोई शिकायती पत्र नहीं भेजा है. शिकायतकर्ता ने लखनऊ के एसएसपी को भी शिकायत भेजकर इस प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है. Also Read - शर्मनाक: नशे में धुत बड़े भाई ने शादीशुदा बहन के साथ किया Rape, वीडियो भी बनाया

डॉ. राय ने अपने जवाब में कहा है कि उन्होंने जांच अधिकारी से यह अनुरोध किया है कि “प्रथम दृष्टतया यह देखें कि क्या आरोपों की प्रकृति इस प्रकार की है कि कुलपति जैसे महत्वपूर्ण एवं सम्मानित पद से मुझे तत्काल हटा दिया जाए.’ उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच तत्काल पूरी की जाए और तत्काल उनकी शक्तियां बहाल की जाए और इस पूरे मामले में शामिल षड्यंत्रकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए. Also Read - UP: घर से लड़की के लापता होते ही आया था फोन- वीडियो कर देंगे वायरल, फ‍ि‍र रेलवे पटरी के पास मिली लाश

गौरतलब है कि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राय के खिलाफ सामान्य परिषद ने 17 फरवरी, 2018 को एक जांच बैठा दी थी और जांच के दौरान उन्हें कुलपति के कार्य से विरत कर दिया था. सामान्य परिषद ने 16 जून, 2018 को डॉ. राय को आरोपपत्र सौंपा था और उनसे 15 दिनों के भीतर अपना जवाब जांच अधिकारी न्यायमूर्ति शैलेंद्र सक्सेना को सौंपने को कहा था.