लखनऊ: सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव आज 19 सितंबर से साइकिल यात्रा का शुभारंभ टाल दिया है. अब अखिलेश खजांची नाम के बच्चे के जन्मदिन 2 दिसंबर से 2019 के चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे. पारिवारिक झगड़े और चाचा शिवपाल सिंह यादव को दरकिनार करने वाले अखिलेश यादव के लिए आखिर छोटा सा बच्चा खजांची इतना महत्वपूर्ण हो गया है कि उसे अखिलेश ने बीजेपी के विरोध का प्रतीक बना लिया है. समय-समय पर अखिलेश यादव खजांची को याद करते हैं. उससे मिलते हैं और बीजेपी पर निशाना साधते हैं.

खजांची, जिसका होना अखिलेश के लिए महत्वपूर्व बन गया
दरअसल, जब पीएम मोदी द्वारा नोटबंदी का ऐलान किया गया, उस समय कानपुर के झींझक इलाके की रहने वाली सर्वेशा देवी नामक महिला 2016 में प्रेग्नेंट थी. सपेरा जाति से ताल्लुक रखने वाली महिला के पति की प्रेगनेंसी के दौरान हो गई थी. जब नोटबंदी हुई तो उस समय सर्वेशा 9 माह की प्रेग्नेंट थी. नोटबंदी के कारण उसे रुपए जमा करने और निकालने के लिए बैंक में लाइन में लगना पड़ा. 2 दिसंबर, 2016 को पंजाब नेशनल बैंक में वह पांच घंटे तक लाइन में लगी रही, तभी उसे प्रसव पीड़ा हुई और उसने बैंक में ही बच्चे को जन्म दे दिया. अखिलेश यादव को जब ये पता चला तो उन्होंने ही बच्चे का नामकरण किया और उसे खजांची नाम दे दिया. इसके बाद अखिलेश ने बच्चे की मां को 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी थी.

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खजांची को दिए थे 2 लाख रुपए
अखिलेश खजांची को समय-समय पर याद करते हैं. 2 दिसंबर, 2017 को अखिलेश यादव ने खजांची का जन्मदिन भी मनाया था. एक साल पहले खजांची बीमार पड़ा तो उसमें करीब 60 हजार रुपए खर्च हुए. अखिलेश ने खजांची का जन्मदिन मनाते हुए केंद्र सरकार पर तंज कसा था कि नोटबंदी में बैंक की क़तार में जन्मा ‘ख़ज़ांची’ एक साल का हो गया, लेकिन उसके घरवालों का खाता आज भी ख़ाली है. वो काला धन वापस आने की झूठी उम्मीदों की क़तार में आज भी खड़े हैं. वो ग़रीब-भोले लोग तो ये भी नहीं जानते कि ‘राजनीतिक जुमला’ किसे कहते हैं.’

खजांची के जन्मदिन से शुरू करेंगे यात्रा
अब एक बार फिर अखिलेश ने इस बच्चे को बीजेपी के खिलाफ चुनाव प्रचार में चेहरा बनाने का फैसला किया है. इसीलिए वह खजांची के जन्मदिन से ही साइकिल यात्रा शुरू कर रहे हैं. हालांकि चुनाव प्रचार के लिए साइकिल यात्रा टालने के पीछे शिवपाल सिंह यादव का पार्टी से अलग होना और गठबंधन की स्थिति अभी साफ नहीं होना भी बताया जा रहा है.