लखनऊ: पूर्व सीएम अखिलेश यादव के सरकारी बंगले में तोड़फोड़ के मामले की योगी सरकार जांच कराएगी. जांच के लिए पांच सदस्‍यीय कमेटी गठित की गई है. कमेटी यूपी लोक निर्माण विभाग द्वारा गठित की गई है. इसमें पांच सदस्‍य होंगे. अखिलेश यादव के सरकारी बंगला छोड़ने के बाद वहां से सामने आई तोड़फोड़ की तस्‍वीरों के बाद राज्‍य संपत्ति अधिकारी योगेश कुमार शुक्‍ला ने इसकी जांच के लिए लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा था. इसी पत्र को संज्ञान में लेते हुए लोक निर्माण विभाग ने जांच के लिए कदम उठाया है.

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बता दें कि सपा अध्‍यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्‍यमंत्री को लखनऊ के चार विक्रमादित्‍य मार्ग पर सरकारी बंगला आवंटित किया गया था. पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूर्व मुख्‍यमंत्रियों द्वारा सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दिया था. इस आदेश के तहत यूपी के छह पूर्व मुख्‍यमंत्रियों अखिलेश यादव, मायावती, मुलायम सिंह यादव, एनडी तिवारी, राजनाथ सिंह और कल्‍याण सिंह को सरकारी बंगला खाली करना था. इसके तहत पहले तो अखिलेश यादव ने दो साल का वक्‍त मांगा था लेकिन बाद में उन्‍होंने बंगला खाली कर दिया. बंगले को मीडिया के लिए खोला गया था. बंगले में तोड़फोड़ और नालों की टोटी और टाइल्स तक गायब होने की बात कही गई थी.

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सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के आधा दर्जन पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने सरकारी बंगले खाली करने के आदेश दिए थे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों को 15 दिन में बंगले खाली करने के नोटिस जारी किए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि मुलायम सिंह यादव समेत राज्य के सभी छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला खाली करना होगा. शीर्ष अदालत ने कहा था कि 1997 के जिस नियम के तहत उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला दिया गया है, उसका कोई कानूनी आधार नहीं है. उन्हें जिंदगी भर के लिए सुविधाएं नहीं दी जा सकती हैं. इस आदेश के बाद अखिलेश यादव के साथ मुलायम सिंह यादव ने भी दो साल का समय मांगा था, उनकी मांग को खारिज कर दिया गया. आज शनिवार को 15 दिन की मोहलत ख़त्म हो रही है. इसीलिए बंगला खाली करने में तेजी की गई.